आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
आज़मगढ़: भारतीय सांस्कृतिक सहयोग एवं मैत्री संघ (इस्कफ़)उत्तर प्रदेश का दो दिवसीय चौथा राज्य सम्मेलन 12,13 नवम्बर को श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय,जोकहरा आज़मगढ़ में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन स्थल का नाम राहुल सांकृत्यायन नगर और सभागार का नाम कैफ़ी आज़मी के नाम रखा गया था। भव्य पुस्तकालय परिसर, सभागार और आस पास का वातावरण मनमोहक था।
इस सम्मेलन में 14 जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसमे प्रमुख रूप से चित्रकूट, फतेहपुर, इलाहाबाद, फतेहपुर, बरेली, जौनपुर, वाराणसी, सोनभद्र, बहराइच, मऊ, महराजगंज, कुशीनगर आदि जिले प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
दोपहर तक प्रतिनिधि जोकहरा पहुँच चुके थे। इस सम्मेलन में नेपाल से तीन सदस्यों का सांस्कृतिक दल मैत्री और भाईचारे को मजबूत करने शारिक रब्बानी के नेतृत्व में शामिल हुआ। सम्मेलन में मुख्य अतिथि का. अरविंद राज स्वरूप,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य सचिव उप्र,सम्मेलन के पर्यवेक्षक राष्ट्रीय सचिव इस्कफ़ रवींद्रनाथ राय, इस्कफ़ उप्र महामंत्री मोतीलाल आदि की उपस्थिति में शिक्षक नेता हरिगेन राम ने ध्वजारोहण किया। इस बीच विश्व शांति ज़िंदाबाद,भारत-नेपाल मैत्री ज़िंदाबाद के नारे से पुस्तकालय परिसर गूंज उठा।
सम्मेलन में आये अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति की तरफ से इस्कफ़ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र हरि पांडेय ने किया।तत्पश्चात 'वर्तमान परिवेश में सांस्कृतिक चुनौतियां 'विषय पर आनंद मालवीय की अध्यक्षता में एक सफल परिचर्चा हुई। इस परिचर्चा में प्रगतिशील लेखक संघ उप्र के महासचिव डॉ. संजय श्रीवास्तव, प्रोफेसर हसीन खान, प्रवक्ता मनोज कुमार सिंह ने प्रमुखता से विचार रखे। मुख्य अतिथि का.अरविंद राज स्वरूप, सम्मेलन के उद्घाटनकर्ता रवींद्रनाथ राय ने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किये। परिचर्चा के अध्यक्ष आनंद मालवीय ने कहा कि संस्कृति एक व्यापक शब्द है। मनुष्य के श्रम पर आधारित और खान-पान, रहन-सहन, वेश-भूषा आदि संस्कृति के अंग हैं।दुनियांभर के देशों में सांस्कृतिक बहुलता है। इन सांस्कृतिक मूल्यों के साथ चलना और विभिन्न संस्कृतियों के साथ सामंजस्य बिठाने,आदर करने की महती आवश्यकता है। इससे हम विश्व स्तर पर एकता और भाईचारे को मजबूत कर मानवता की सर्वोच्च सेवा कर सकते हैं।
इस सांस्कृतिक सम्मेलन में नेपाल से आये प्रगतिशील लेखक संघ, नेपाल केंद्रीय समिति के सदस्य प्रोफेसर हरिप्रसाद तिमिलसिना, प्रवक्ता मीना बराल,फ़िल्म और लोक कलाकार खगेंद्र नेपाल ने भी वैचारिक, सांस्कृतिक सत्र में भाग लिया।खगेंद्र नेपाल ने थारू और नेपाली लोकनृत्य से प्रतिनिधियों को गदगद कर दिया। भेरी साहित्य समाज की तरफ से हरिप्रसाद तिमिलसिना ने उत्तर प्रदेश इस्कफ़ के महासचिव मोतीलाल और इस सम्मेलन के कर्ता-धर्ता जितेंद्र हरि पांडेय को 'मायाको चिनो' अर्थात प्रेम की निशानी स्मृति चिंह भेंट किया। वहीं सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नेपाली अतिथियों ने कहा कि हम यहाँ सांस्कृतिक सम्मेलन में हिस्सा लेकर अविभूत हैं।हम आने वाले समय मे इस मेलजोल को और आगे बढ़ाएंगे।इसके बाद मऊ से मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में आये शायर सलमान घोषवी ने कैफ़ी आज़मी पर नज़्म सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। लोक गायक विपिन बिहारी पाठक और उमेश बिहारी ने पारंपरिक गीतों को सुनाकर श्रोताओं का मनोरंजन किया।
सम्मेलन के दूसरे दिन आनंद मालवीय,सालिक राम पटेल और अमित यादव के संयुक्त अध्यक्ष मंडल ने प्रतिनिधि सत्र का संचालन किया। संगठन के प्रादेशिक महासचिव मोतीलाल ने सांगठनिक रिपोर्ट प्रस्तुत किया। रिपोर्ट पर प्रतिनिधियों ने चर्चा की। सांस्कृतिक प्रस्ताव पारित करते समय यह तय किया गया कि संगठन की सांस्कृतिक गतिविधियों से व्यापक रूप से जनता को जोड़ना पड़ेगा। इसके लिए खेल-कूद प्रतियोगिता,कला,और प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवसों पर सांस्कृतिक पहल की महती आवश्यकता है। इस समय पर्यावरण संकट विश्व के लिये बड़ा संकट है, इसके लिये इस्कफ़ को सांस्कृतिक तरीके से जनता में जागरूकता बढ़ानी पड़ेगी। जौनपुर,पंवारा के सजईंकला में शहीद दिवस पर प्रतिवर्ष इस्कफ़ की भागीदारी सुनिश्चित की गयी।
सम्मेलन में वामपंथी चिंतक,शिक्षक कन्हैयालाल को इस्कफ़ गौरव सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कन्हैयालाल ने कहा कि वह 1962 में हाईस्कूल में नामांकन कराते समय नाम के आगे जाति के कालम को नहीं भरा।आज़मगढ़ के करखियाँ इंटर कॉलेज में शिक्षण कार्य शुरू करने के दौरान राहुल सांकृत्यायन को पढ़ने का अवसर मिला। भागो नही दुनियां को बदलो पढ़कर मार्क्सवाद की तरफ झुकाव हुआ और 1972 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य बन गया।उन्होंने बताया कि 40 वर्ष शिक्षक कार्य करते हुये 40 दिन का भी आकस्मिक अवकाश नहीं लिया। एक संस्मरण सुनाते हुये उन्होंने कहा कि एकबार उप्र सरकार के एक मंत्री ने कहा कि आप शिक्षक सम्मान के लिये फॉर्म भर दीजिये, इससे आपकी सेवा दो वर्ष और बढ़ जाएगी। तब आपने मंत्री जी से कहा कि एक शिक्षक को सम्मान पाने के लिए फॉर्म भरना पड़े, यह तो हम नहीं कर पाएंगे। कन्हैयालाल ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में गरीबों के बच्चे ज्यादा पढ़ते हैं। एक वामपंथी शिक्षक का कक्षा में छात्रों के साथ जीवंत संबंध होता है। जिससे पठन पाठन रुचिकर होता है। अंत में अपने संबोधन में कहा कि जिस सम्मान के लिए हमने कभी फॉर्म नहीं भरा, उस सम्मान को आज इस्कफ़ ने बिना फॉर्म भरे ही दिया है। मै इस सम्मान से बेहद प्रशन्नता व्यक्त करता हूँ। कन्हैयालाल जी के अभिवादन में सभागार में मौजूद सभीलोग खड़े होकर देर तक तालियां बजाते रहे।
सम्मेलन में उपस्थित प्रमुख लोगों में अरविंद राज स्वरूप, आनंद मालवीय, रवींद्रनाथ राय, डॉ.संजय श्रीवास्तव, प्रो.हसीन खान, मनोज कुमार सिंह, नेपाल के अतिथि हरिप्रसाद तिमिलसिना, मीना बराल, खगेंद्र नेपाल, इप्टा,इस्कफ़ के संरक्षक प्रख्यात कथाकार विभूति नारायण राय, हिरिमन्दिर पांडेय, डॉ. रामनारायण राम, हरिगेन राम, कलाकार विपिन बिहारी पाठक, उमेश बिहारी, इप्टा आज़मगढ़ अध्यक्ष रुस्तम, इस्कफ़ आजीवन सदस्य नसीम अहमद, डॉ. एए खान को इस्कफ़ मैत्री सम्मान देकर सम्मानित किया गया।
अगले तीन वर्षों के लिये 25 सदस्यों की राज्य समिति चुनाव हुआ। सर्वसम्मति से शारिक रब्बानी को अध्यक्ष, आनंद मालवीय और मनोज कुमार सिंह को उपाध्यक्ष चुना गया।मोतीलाल को महासचिव, जितेंद्र हरि पांडेय को सहायक सचिव एवं कमला सिंह तरकश,अमित यादव को मंत्रिपरिषद सदस्य चुना गया। अनीस अहमद को कोषाध्यक्ष चुना गया। इस सम्मेलन में प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष एवं कथाकार विभूति नारायण राय को उप्र इस्कफ़ संरक्षक का दायित्व सौंपा गया। सम्मेलन समापन के समय महासचिव मोतीलाल ने श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय से जुड़े सभी कर्मियों की सराहना करते हुये कहा कि यहाँ जो आवभगत मिली वह अपने आप मे खुद एक संस्कृति है। सम्मेलन में आये अतिथियों, प्रतिनिधियों के प्रति संगठन की तरफ से आभार व्यक्त किया। सभी ने आज़मगढ़ के इस चौथे राज्य सम्मेलन को काफी कामयाब और यादगार बताया।