प्रयागराज।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
प्रयागराज: इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) यूनिट 9 के स्वयंसेवकों ने अपने तीसरे दिन के कार्यक्रम में विविध गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय सेवा योजना के लक्ष्य गीत से की गई, जिसके बाद एनएसएस क्लैप के महत्व पर चर्चा की गई।
स्वयंसेवकों ने अपने विचारों और अनुभवों के माध्यम से न केवल खुद को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया, बल्कि समाज की समस्याओं पर विचार कर जागरूकता भी फैलाने की दिशा में कदम बढ़ाया। इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने लेखन, गायन, शेरो-शायरी, कविता, और विचारों के अभिव्यक्ति के रूप में अपनी कला को प्रदर्शित किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के महत्व पर विचार प्रस्तुत करते हुए टीम लीडर मयंक मिश्र ने राष्ट्रीय सेवा योजना के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एनएसएस के नियमित गतिविधियों के कारण व्यक्तित्व विकास में कैसे मदद मिलती है।
मयंक मिश्र ने स्वयंसेवकों को यह समझाया कि छोटी-छोटी संगोष्ठियों और प्रयासों के माध्यम से वे अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। स्वयंसेवकों ने समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए, जिनमें साइबर क्राइम, मोबाइल फोन एडिक्शन और बच्चों की मानसिक स्थिति जैसी समस्याओं पर चर्चा की।
उन्होंने इस बात पर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता जताई कि बच्चे रोज़ाना इन समस्याओं का सामना करते हैं और इससे निजात पाने के लिए उन्हें समझदारी से कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, 'आत्म तत्व' और 'अनेकता में एकता' जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी बच्चों ने अपने विचार रखे। उन्होंने यह बताया कि हमें अपनी विविधता को समझते हुए एकजुट होकर समाज की दिशा में कार्य करना चाहिए। आपको बता दे की स्वयंसेवकों ने शेरो-शायरी, वीर रस की कविताओं और हास्य पदों के माध्यम से सभी का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में रंग और उल्लास का माहौल पैदा किया। कुछ बच्चों ने अपनी व्यक्तिगत कहानियाँ भी सुनाईं, जिससे कार्यक्रम में और अधिक जोश और सजीवता आई। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्रा ने युवाओं की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे युवा समय नियोजन में कठिनाई महसूस करते हैं, योजना बनाने के बावजूद उन्हें उसे क्रियान्वित नहीं कर पाते, असमंजस का सामना करते हैं और परिणाम के बारे में अत्यधिक सोचते हैं। इसके अतिरिक्त, परिवार की अपेक्षाओं का दबाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई और इनके निदान के उपायों पर बात की गई तत्पश्चात, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गणित के आचार्य डॉ. अवनीश चतुर्वेदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए विकास और विकृति, जीवन के लक्ष्य, धर्म और अध्यात्म पर विचार व्यक्त किए।
उन्होंने वैदिक गणित के महत्व और भारत के गौरवपूर्ण इतिहास को याद करते हुए आज के युवाओं के कर्तव्यों और उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में, कुछ बच्चों ने महाकुंभ के अनुभवों को साझा किया और इस पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कुंभ के दौरान पर्यावरण प्रदूषण में काफी वृद्धि हुई है, और इसे संभालने के लिए हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। कुछ स्वयंसेवकों ने यह भी सुझाव दिया कि जिन पेड़ों की हानि हुई हम उन्हें वापस तो नहीं ला सकते, लेकिन हम नए वृक्ष लगा सकते हैं और उनकी देखभाल करके प्रदूषण को कम करने का प्रयास कर सकते हैं।
कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से सभी को प्रभावित किया, जिनमें टीम लीडर मयंक मिश्र समेत गौरव, उत्कर्ष चतुर्वेदी, उत्कर्ष शुक्ला, रवि चौधरी, शिवांश सिंह, प्रदीप कुमार, सौरव, विकास, प्रभात, प्रकाश कुमार, मारुति नंदन, निशांत, अमरनाथ कुमार, सूरज कुमार मौर्य, आयुष्मान वर्मा, दुष्यंत, अंकित, चिंटू, अशोक, हिमांशु, मणिशंकर मिश्र, बृजमोहन तिवारी, विनय और मयंक का नाम प्रमुख रूप से लिया जा सकता है। इन बच्चों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम में चार चांद लगाए और अपनी कला का परिचय दिया। इस प्रकार, इस दिन का कार्यक्रम न केवल मनोरंजन से भरपूर था, बल्कि समाज के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और समाधान के विचारों से भी ओत-प्रोत था।