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शिक्षक दिवस पर याद किए गए संघर्ष के प्रतीक पंचानन राय


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

शिक्षकों की आवाज़, संघर्ष का दूसरा नाम—पंचानन राय

आज़मगढ़। सगड़ी तहसील क्षेत्र के गांधी इंटर कॉलेज मालटारी में शिक्षक दिवस के अवसर पर जहां भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धापूर्वक याद किया गया, वहीं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व महामंत्री, पूर्व एमएलसी और शिक्षकों के सच्चे हितैषी स्वर्गीय पंचानन राय की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
विद्यालय परिसर में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर उपस्थित शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने उन्हें नमन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने राय साहब के संघर्षपूर्ण जीवन और शिक्षकों के हक की लड़ाई को याद करते हुए उन्हें “संघर्ष का प्रतीक” बताया।

संघर्ष की विरासत

मुकेश राय ने बताया कि पंचानन राय ने 1966 में टाउन इंटर कॉलेज से शिक्षक जीवन की शुरुआत की। उसी समय से उन्होंने शोषित और पीड़ित शिक्षकों की आवाज़ बुलंद की। 1968 के आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी और 1971 में जिला मंत्री बनने के बाद वे लगातार संगठन को मजबूत करते रहे।
1977 में प्रदेश मंत्री और 1982 में प्रदेशीय महामंत्री बने। पाँच सितम्बर 2007 तक वे इसी पद पर रहकर शिक्षकों के अधिकारों के लिए लड़ते रहे।

सत्ता में रहकर भी संघर्षरत

1980 में वे कांग्रेस से सगड़ी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। लेकिन विधायक बनने के बाद भी उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ शिक्षकों के हक में आवाज़ उठाई। डॉ. वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि राय साहब 1996 और 2002 में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य बने। सत्ता और विपक्ष—दोनों जगह रहते हुए भी वे शिक्षक, किसान, मजदूर और नौजवानों की आवाज़ बनकर डटे रहे।

संघर्ष का अंत, लेकिन यादों की विरासत

प्रदेश उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने कहा कि राय साहब का जीवन पूरी तरह शिक्षक समाज को समर्पित था। वे हमेशा कहते थे—“मैं पहले शिक्षक हूं, फिर नेता।” अमेठी में शिक्षक सम्मेलन में जाते समय जौनपुर के धनियामऊ मोड़ पर एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया। ठीक उसी दिन उन्होंने जौनपुर में शिक्षक कार्यालय का उद्घाटन भी किया था।

एक युगपुरुष की पहचान

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा—पंचानन राय संघर्ष के पर्याय थे, वे हर दिल अज़ीज़ और नेक इंसान थे। उनकी स्मृतियां और संघर्ष आज भी नई पीढ़ी को प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. वीरेंद्र कुमार सिंह, शिक्षक नेता नरेंद्र सिंह, मुकेश राय, अरुण मिश्रा, चंद्र प्रकाश राय, टिल्ठू राम यादव, परमानंद मिश्र, राजेश कुमार सिंह, ओमप्रकाश राय, भद्रसेन यादव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक व क्षेत्रीय सम्मानित नागरिक मौजूद रहे।

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