प्रत्येक पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड, एक आरोपी साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त
आजमगढ़। ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत प्रभावी पैरवी के बाद आजमगढ़ की एक अदालत ने दहेज हत्या और प्रताड़ना के मामले में चार आरोपियों को दोषसिद्ध करार देते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं मामले में नामजद एक महिला आरोपी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
मामला गंभीरपुर थाना क्षेत्र के हरिश्चन्दपुर गांव का है। पुलिस के अनुसार, तीन जनवरी 2020 को कंधरापुर थाना क्षेत्र के दूधनारा गांव निवासी राहुल राय ने गंभीरपुर थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनकी बहन को ससुराल पक्ष के लोग दहेज में कार की मांग को लेकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। आरोप था कि उसके साथ मारपीट करने के बाद उसे जलाकर उसकी हत्या कर दी गई।
तहरीर के आधार पर गंभीरपुर थाने में मुकदमा अपराध संख्या 01/2020 के तहत धारा 498ए, 304बी भादवि तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
पुलिस के मुताबिक मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। गुणवत्तापूर्ण विवेचना, मॉनिटरिंग सेल की निगरानी और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के बाद 11 सितंबर 2026 को एएसजे-3 आजमगढ़ की अदालत ने फैसला सुनाया।
अदालत ने रामदरश राय, मंजू राय, सुदीप उर्फ धीरज राय और सचिन राय को दोषसिद्ध पाते हुए प्रत्येक को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं मामले में नामजद पूजा राय को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
पुलिस ने इसे ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत प्रभावी अभियोजन पैरवी का परिणाम बताया है।