आजमगढ़। जनपद पुलिस की गुणवत्तापूर्ण विवेचना, मॉनिटरिंग सेल की निगरानी और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के चलते गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में न्यायालय ने आरोपी को सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष गैंगस्टर-पॉक्सो कोर्ट, आजमगढ़ ने आरोपी के जुर्म स्वीकार करने के आधार पर जेल में बिताई गई 7 वर्ष 25 दिन की अवधि को कारावास के रूप में मानते हुए 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
पुलिस के अनुसार, मामला सिधारी थाने में दर्ज गैंगस्टर एक्ट से संबंधित है। 3 सितंबर 2019 को तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक प्रशांत मिश्रा की तहरीर पर राजन यादव पुत्र विजय बहादुर यादव, निवासी भीरा, थाना बरदह, आजमगढ़ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस का आरोप था कि आरोपी ने संगठित गिरोह बनाकर अपने तथा गिरोह के सदस्यों के भौतिक, आर्थिक एवं दुनियाबी लाभ के लिए आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया। मामले में सिधारी थाने पर मु0अ0सं0 230/2019, धारा 3(1) उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था।
विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी द्वारा जुर्म स्वीकार किए जाने के आधार पर न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया।
पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई 'ऑपरेशन कनविक्शन' अभियान के तहत प्रभावी विवेचना, न्यायालय में प्रभावी पैरवी और मामलों की निरंतर मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप हुई।