सात घंटे तक बच्चों को बचाने के लिए अरविंद को समझाती रही पुलिस, गोली चलने के बाद तोड़ना पड़ा कमरे का दरवाजा
आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शम्भूपुर गहजी गांव में पत्नी और दो अन्य लोगों की हत्या के बाद बच्चों को कमरे में लेकर बंद हुए अरविंद के खिलाफ पुलिस का करीब सात घंटे तक ऑपरेशन चला। पुलिस और परिजनों ने उसे लगातार समझाकर बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने की अपील की, लेकिन वह कमरे से बाहर नहीं आया। इसी दौरान बच्चों को जान से मारने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई।
पुलिस के अनुसार, देर रात कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। बच्चों की जान पर तत्काल खतरा देखते हुए एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और पुलिसकर्मी प्रदीप ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। अंदर नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने से घायल मिला। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस का दावा: शौर्य को अरविंद ने मारी गोली
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शौर्य के शरीर पर गोली के प्रवेश वाले स्थान पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग और स्कॉर्चिंग के निशान मिले हैं। पुलिस के मुताबिक ये तथ्य बहुत नजदीक से गोली चलने की ओर संकेत करते हैं। पुलिस टीम के अनुसार, कार्रवाई से पहले वह बच्चे से करीब 8 से 10 फीट की दूरी पर थी और आरोपी को निष्क्रिय किए जाने के बाद ही टीम बच्चों तक पहुंच सकी।
पुलिस ने पोस्टमार्टम में बताई गई गोली की ट्रैजेक्टरी और एंट्री वुंड के आकार का भी उल्लेख किया है। पुलिस का दावा है कि ये तथ्य आरोपी के पास मौजूद .32 बोर रिवॉल्वर से संबंधित गोली से मेल खाते हैं। हालांकि घटनास्थल से मिले फॉरेंसिक साक्ष्यों की जांच और विधिक प्रक्रिया जारी है।
बच्ची के बयान को भी जांच में महत्वपूर्ण माना
पुलिस के अनुसार, कमरे से सुरक्षित निकाली गई 11 वर्षीय परी ने बताया कि उसके पिता अरविंद ने ही उसके भाई शौर्य को गोली मारी थी। पुलिस का कहना है कि बच्ची घटनाक्रम के दौरान कमरे में मौजूद थी और उसके बयान को अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के साथ जांच में शामिल किया जा रहा है।
पुलिस पर फायरिंग के बाद जवाबी कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, शौर्य के घायल होने के बाद भी अरविंद ने पुलिस टीम पर फायरिंग की। बच्चों की सुरक्षा और पुलिसकर्मियों की आत्मरक्षा को देखते हुए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें अरविंद घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। सात घंटे चले ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने बाकी दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला था।
अब दोनों बच्चियों के साथ खड़ा होगा पुलिस परिवार
इस घटना के बाद माता-पिता के साये से वंचित हुई दोनों बच्चियों की देखभाल के लिए आजमगढ़ पुलिस ने आगे आने का निर्णय लिया है। पुलिस के अनुसार, दोनों बच्चियों के पालन-पोषण और शिक्षा में पुलिस परिवार सहयोग करेगा।
एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार ने एक माह का वेतन देने की घोषणा की है, जबकि जनपद के पुलिसकर्मी एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए देंगे। पुलिस का कहना है कि दोनों बच्चियों के भविष्य और शिक्षा में यथासंभव सहयोग किया जाएगा।
घटनास्थल से फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बच्ची के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई जारी है।