आजमगढ़। ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत प्रभावी विवेचना और अभियोजन पक्ष की पैरवी के बाद पवई थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के प्रयास के मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध करार दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश (पीसी एक्ट), कोर्ट नंबर-1, आजमगढ़ ने आरोपी को पांच वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
पुलिस के अनुसार, 2 दिसंबर 2014 को महुआ गांव निवासी वलीउल्लाह पुत्र इलियास ने पवई थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 1 दिसंबर की रात शौच से लौटते समय मुस्लिम पुत्र स्वर्गीय बदरुद्दीन ने उसके साथ गाली-गलौज की और गोली चला दी। गोली उसके बाएं पैर में घुटने के नीचे लगी थी। गोली चलने की आवाज सुनकर लोगों के मौके पर पहुंचने पर आरोपी के फरार होने की बात तहरीर में कही गई थी।
मामले में पवई थाने पर मु0अ0सं0 122/2014 के तहत धारा 307 और 504 आईपीसी में मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में धारा 307 को धारा 325 आईपीसी में परिवर्तित किया गया। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को आरोपी मुस्लिम पुत्र स्वर्गीय बदरुद्दीन, निवासी महुआ, थाना पवई, आजमगढ़ को दोषसिद्ध करार देते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
पुलिस के अनुसार, यह फैसला ऑपरेशन कनविक्शन के तहत गुणवत्तापूर्ण विवेचना, मॉनिटरिंग सेल की निगरानी और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप आया है।