बीएड ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विद्यार्थियों को दिया मार्गदर्शन, साहित्यिक योगदान के लिए मिला ‘साहित्य रत्न सम्मान 2026’
सठियांव (आजमगढ़)। राजदेव कृषक पीजी कॉलेज, काशीपुर सुराई, सठियांव में बीएड सत्र 2026-28 के शुभारंभ के अवसर पर ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा संकाय, श्री गांधी पीजी कॉलेज मालटारी के प्रो. अखिलेश चन्द्र ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य गौरवपूर्ण है। शिक्षक अपनी कक्षा में विद्यार्थियों के माध्यम से देश के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. अखिलेश चन्द्र को साहित्यिक योगदान के लिए ‘साहित्य रत्न सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी कहानी संग्रह ‘रेहन पर खेत’ की प्रतियां प्रो. प्रेम प्रकाश यादव और महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आरके गुप्ता को भेंट कीं।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. प्रेम प्रकाश यादव ने की। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आरके गुप्ता ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। महाविद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के एक सत्र में विद्यार्थियों के लिए व्याख्यान आयोजित किया गया, जबकि दूसरे सत्र में सम्मान समारोह और कविता पाठ हुआ। प्रो. अखिलेश चन्द्र ने अपने मुक्तक ‘मां भारती का हर वक्त सम्मान करता हूं...’ सहित भोजपुरी गीत ‘लेवे दिहे मोहे जनम हो’ और ‘हमार सुगना’ प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुतियों पर विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. वंदना सिंह ने किया। इस अवसर पर राजदेव कृषक पीजी कॉलेज के साथ रामराजी महिला पीजी कॉलेज, सठियांव की बीएड छात्राओं सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
साहित्य और शोध के क्षेत्र में सक्रिय योगदान
कार्यक्रम में बताया गया कि प्रो. अखिलेश चन्द्र को हाल ही में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के भोजपुरी अध्ययन केंद्र और मानस पत्रिका, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘मानस शब्द शिल्पी सम्मान 2026’ से भी सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आजमगढ़ रोटरी क्लब की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
आयोजकों के अनुसार, प्रो. अखिलेश चन्द्र पिछले 26 वर्षों से साहित्य, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में पर्यावरण दशा और दिशा, उच्च शिक्षा दशा और दिशा, सहचर मन, पर्यावरण शिक्षा, बर्न आउट एंड पर्सनैलिटी फैक्टर, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अनकही और रेहन पर खेत शामिल हैं।
वे पिछले 16 वर्षों से अपने प्रधान संपादन में ‘अखिल गीत शोध दृष्टि’ अंतरराष्ट्रीय शोध अर्द्धवार्षिक पीयर रिव्यूड जर्नल का संपादन कर रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक अब तक इसके 26 अंक प्रकाशित हो चुके हैं और इसमें भारत के 23 राज्यों तथा छह देशों के लेखकों की सहभागिता रही है। प्रो. चन्द्र के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 70 शोध पत्र प्रकाशित होने की जानकारी भी कार्यक्रम में दी गई।
उनकी कहानी ‘हंसूली’ का नाट्य रूपांतरण कर समूहन कला संस्थान, आजमगढ़ की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर मंचन किए जाने की जानकारी भी दी गई। उनके लिखे गीतों में ‘हमार सुगना’, ‘लेवे दिहे मोहे जनम हो’, ‘मेरे राम आए हैं’, ‘जिंदगी बस प्यार का ताना-बाना है’ और ‘तेरे संग जीना है, अब तेरे संग मरना है’ प्रमुख बताए गए।
आयोजकों ने बताया कि उनकी पुस्तक ‘रेहन पर खेत’ का प्रकाशन सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली से हुआ है और इसका लोकार्पण महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के तीसरे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की उपस्थिति में किया गया था। कार्यक्रम में उनके साहित्यिक कार्यों के लिए अब तक मिले विभिन्न सम्मानों का भी उल्लेख किया गया।