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मुबारकपुर इंटर कॉलेज के मुख्य गेट का निर्माण चर्चा में, गुंबदनुमा आकृति हटाने पर सहमति


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आजमगढ़। मुबारकपुर स्थित मुबारकपुर इंटर कॉलेज के निर्माणाधीन मुख्य द्वार का स्वरूप इन दिनों चर्चा में है। सोशल मीडिया पर निर्माणाधीन गेट के फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद इसके स्वरूप को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। मामले की जानकारी मिलने पर राजदेवपुर मठ के महंत शिव सागर भारती महाराज ने विद्यालय पहुंचकर प्रबंधन से बातचीत की।

महंत शिव सागर भारती महाराज के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि विद्यालय के मुख्य द्वार का निर्माण अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से प्रेरित स्वरूप में कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका सवाल किसी विशेष शैली में गेट बनाए जाने को लेकर नहीं, बल्कि निर्माण की प्रक्रिया और उसके लिए लिए गए निर्णय को लेकर है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से यह स्पष्ट करने की मांग की कि मुख्य द्वार का स्वरूप किसके निर्णय और अनुमति के आधार पर तय किया गया।

उन्होंने बताया कि विद्यालय प्रबंधन से बातचीत के दौरान निर्माणाधीन द्वार पर बनी गुंबदनुमा आकृति को हटाने पर सहमति बनी है। प्रबंधन की ओर से इसे जल्द हटाए जाने का आश्वासन दिया गया है।

1958 में हुई थी विद्यालय की स्थापना

मुबारकपुर इंटर कॉलेज एक सहायता प्राप्त विद्यालय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विद्यालय को वर्ष 1958 में जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली थी। इसके बाद वर्ष 1964 में हाईस्कूल और वर्ष 1966 में इंटरमीडिएट की मान्यता प्राप्त हुई। विद्यालय कक्षा छह से 12 तक संचालित होता है।

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, मुख्य द्वार का निर्माण विद्यालय की जमीन और भवन प्रबंध समिति के अधीन कराया जा रहा है। प्रबंधक मोहम्मद शहजाद ने मुख्य द्वार के स्वरूप को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से प्रेरित बताया था।

प्रशासन की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई

मामले को लेकर जिला प्रशासन और जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से फिलहाल कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में निर्माण के लिए स्वीकृति, प्रक्रिया और संबंधित विभागीय अनुमति को लेकर स्थिति आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

महंत शिव सागर भारती महाराज ने कहा कि मुख्य द्वार से गुंबदनुमा आकृति हटाने का निर्णय सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि निर्माण कार्य में निर्धारित नियमों और प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में विद्यालय में होने वाले निर्माण कार्य नियमानुसार और आवश्यक अनुमति के साथ किए जाएंगे।

पहले भी सामने आ चुका है शिक्षा संस्थान से जुड़ा विवाद

आजमगढ़ में इससे पहले भी एक शिक्षण संस्थान से जुड़े वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद विवाद सामने आया था। जनवरी 2026 में आजमगढ़ पब्लिक स्कूल से संबंधित एक वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। उस मामले की जांच रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

हालांकि, वर्तमान मामले में मुख्य द्वार के निर्माण की प्रक्रिया, उसकी स्वीकृति और नियमों के अनुपालन को लेकर संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल दावों और आरोपों के बजाय पूरे मामले की वास्तविक स्थिति आधिकारिक जांच या संबंधित विभाग के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट मानी जाएगी।

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