₹60 हजार में बेची गई चैन की रकम में से ₹5,240 बरामद करने का दावा, दो आरोपी पहले हो चुके हैं गिरफ्तार
सरायमीर, आजमगढ़। सरायमीर थाना पुलिस ने संजरपुर बाजार में महिला के गले से चैन छीनने के मामले का खुलासा करते हुए एक और वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गिरफ्तार अभियुक्त के पास से ₹5,240 नकद बरामद करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, छीनी गई चैन को ₹60 हजार में बेचने के बाद मिली रकम तीनों आरोपियों ने आपस में बांट ली थी।
पुलिस के अनुसार, 9 सितंबर 2026 को संजरपुर बाजार में अस्पताल के पास एक महिला के गले से अज्ञात व्यक्ति द्वारा चैन छीनकर भागने की घटना हुई थी। महिला की तहरीर के आधार पर थाना सरायमीर में मुकदमा अपराध संख्या 231/2026 के तहत धारा 304(2) बीएनएस में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, 18 सितंबर को उपनिरीक्षक अनुज कुमार द्विवेदी पुलिस टीम के साथ वांछित अभियुक्तों की तलाश में थे। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर कोलपुर कुशहां नहर पुलिया के आगे लाहीडीह जाने वाले मार्ग से अनूप यादव पुत्र सुरेन्द्र यादव उर्फ जितेन्द्र यादव, निवासी कोटवा, थाना रानी की सराय, उम्र करीब 19 वर्ष को रात करीब 11:30 बजे गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में सामने आई यह बात
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में अनूप यादव ने बताया कि उसने अपने साथी प्रिंस चौहान और चन्द्रेश यादव के साथ मिलकर 9 सितंबर को संजरपुर बाजार में महिला के गले से चैन छीनी थी। पुलिस का कहना है कि छीनी गई चैन एक राहगीर को ₹60 हजार में बेची गई थी और रकम तीनों ने आपस में बांट ली थी। गिरफ्तार अभियुक्त के हिस्से के ₹5,240 बरामद किए गए।
पुलिस ने बताया कि अभियुक्त की निशानदेही और पूछताछ के आधार पर मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है। मामले में अनूप यादव के दो कथित साथी प्रिंस चौहान और चन्द्रेश यादव को पूर्व में गिरफ्तार किया जा चुका है।
गिरफ्तार अभियुक्त के खिलाफ थाना सरायमीर में मुकदमा अपराध संख्या 231/2026 धारा 304(2)/317(2) बीएनएस के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने बरामदगी में ₹5,240 नकद दर्शाया है।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक अनुज कुमार द्विवेदी, उपनिरीक्षक हरिकेश शर्मा, कांस्टेबल विजय प्रसाद गौड़, कांस्टेबल विजय प्रसाद और रिजर्व कांस्टेबल अरुण कुमार चौधरी शामिल रहे।
नोट: खबर में गिरफ्तारी, बरामदगी और पूछताछ से जुड़ी बातें पुलिस के आधिकारिक दावे के आधार पर हैं। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।