आजमगढ़। ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप न्यायालय ने विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के एक पुराने मामले में आरोपी को दोषसिद्ध करार देते हुए जेल में बिताई गई अवधि की सजा और 3,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
पुलिस के अनुसार, मामला थाना निजामाबाद में वर्ष 1985 में दर्ज मुकदमे से संबंधित है। 13 मई 1985 को तत्कालीन उपनिरीक्षक राम प्रसाद यादव ने तहरीर देकर बताया था कि दिलचैन पुत्र शकूर नट, निवासी खैरुद्दीनपुर, थाना सरायमीर, जनपद आजमगढ़ द्वारा विस्फोटक पदार्थ (बम) ले जाते समय रास्ते में बम फटने के बाद उसके अवशेष बरामद हुए थे।
इस मामले में थाना निजामाबाद पर मुकदमा अपराध संख्या 63/1985 के तहत विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 5 में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कुल पांच गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
मामले में 12 अक्टूबर 2026 को अपर सत्र न्यायाधीश (एएसजे)-3, आजमगढ़ की अदालत ने आरोपी दिलचैन पुत्र शकूर नट को दोषसिद्ध पाते हुए जेल में बिताई गई अवधि की सजा तथा 3,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
पुलिस के मुताबिक, यह फैसला ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत गुणवत्तापूर्ण विवेचना, मॉनिटरिंग सेल की निगरानी और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप आया है।