आज़मगढ़।
बात आज से करीब 40 वर्ष पहले की है। एक गाँव के विद्यालय में एक नए शिक्षक आए थे। उनका काम सिर्फ बच्चों को पढ़ाना ही नहीं था, बल्कि उनमें पढ़ाई का जज्बा भी पैदा करना था। प्रत्येक लड़के से उसकी रुचि और अरुचि की जानकारी लेते रहते थे। उसी हिसाब से पढ़ाते, जिससे बच्चों को समझ में आ जाए। पढ़ाने की शैली पारंपरिक की जगह व्यवहारिक होने से बच्चे बड़ी ही तन्मयता से पढ़ते। धीरे-धीरे उनके पढ़ाने की शैली की चर्चा होने लगी। सभी खूब पसंद भी करते। उसी समय एक दिन गुरुजी को पता चला कि एक लड़का दो दिन से स्कूल नहीं आ रहा है। उन्होंने कक्षा के बाकी बच्चों से उसका कारण जानना चाहा, परन्तु संतोषजनक उत्तर नहीं पा सके। स्कूल की छुट्टी होने के बाद गुरुजी सीधा उस लड़के के घर गए। वहाँ जाकर पता चला कि दो दिन पूर्व पड़ोस के लड़कों से किसी बात को लेकर लड़ाई हो गई थी। अब वे कहते हैं कि स्कूल जाओगे, तो रास्ते में मारेंगे, इसी डर से स्कूल नहीं जा रहा हूँ। तब गुरुजी ने कहा कि ठीक है कल तुम तैयार रहना, मैं अपने साथ ले चलूँगा। इस पर वह लड़का बहुत खुश हुआ। उस लड़के का घर गुरुजी के बगल वाले गाँव में था। अगले दिन गुरुजी अपने घर से सीधे उस लड़के के घर गए और अपने साथ स्कूल ले गए। छुट्टी के समय भी गुरुजी ने पहले लड़के को उसके घर छोड़ा, फिर अपने घर गए। धीरे-धीरे यह सिलसिला चलने लगा। थोड़े ही दिन में स्थिति सामान्य हो गई। गाँव के लोग गुरुजी की बहुत तारीफ कर रहे थे। काफी समय के बाद अचानक फिर से वह लड़का स्कूल आना बंद कर दिया। अब तो गुरुजी बड़े परेशान हो गए। छुट्टी के बाद सीधा उसके घर पहुँचे। इस बार वह लड़का घर से बाहर नहीं निकल रहा था। बात करने पर पता चला कि उसके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं हैं, इसीलिए वह स्कूल नहीं जा रहा है। गुरुजी ने उस लड़के को अपने पास बुलाया और पूछा कि तुम पढ़ना चाहते हो, तो उसने कहा जी गुरुजी। तब गुरुजी ने कहा चलो मेरे साथ। गुरुजी ने गाँव के कपड़े की दुकान से उस लड़के के लिए दो जोड़ी कपड़े बनवा दिए और कहा कि अब स्कूल रोज आना। लड़का गुरुजी के इस रूप से आह्लादित था। वह समझ नहीं पा रहा था कि कैसे गुरुजी को धन्यवाद करे। अगले दिन से वह नियमित स्कूल जाने लगा।
धीरे धीरे समय व्यतीत होने लगा। उस लड़के के घर की माली हालत ठीक नहीं थी। इसलिए उसने अपनी पढ़ाई छोड़कर काम की तलाश में कानपुर आ गया। वहाँ एक लकड़ी के व्यवसायी ने उसे अपने पास काम पर रख लिया। लड़का दिन रात मेहनत करने लगा। जाड़े के दिनों में इतनी मेहनत करता कि शरीर से पसीना निकलने लगता था। उस लड़के का बचपन कब जवानी में तब्दील हो गया, उसे एहसास ही नहीं हुआ। धीरे धीरे वह लड़का मालिक का सबसे दुलारा बन गया।
अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बूते अब वह कानपुर का एक प्रसिद्ध लकड़ी का व्यवसायी बन गया। उस लड़के ने अपनी कमाई से अपने गुरुजी के लिए एक सुंदर सी लकड़ी (सनमाईका) की अटैची तथा दीवान बनाया और गुरुजी के लिए कपड़ा तथा जूता उसमें रखकर गाँव आ गया। गाँव आकर सीधे गुरुजी से मिलने उनके घर गया। गुरुजी के चरण छुए और वहीं जमीन पर बैठ गया। गुरुजी के बार बार कहने पर भी जमीन से उठा नहीं, तब वहीं चटाई बिछाई गई। काफी देर तक गुरु शिष्य बात करते रहे। गुरुजी को अपने शिष्य की सफलता पर गर्व हो रहा था। जाते समय शिष्य ने गुरुजी को अपने साथ कानपुर ले चलने की इच्छा जताई। पहले तो गुरुजी ने मना कर दिया, परन्तु शिष्य के हठ ने उन्हें मजबूर कर दिया। अब तो शिष्य की खुशी का ठिकाना नहीं था। गाँव से ही कानपुर की बस में सवार होकर दोनों लोग चल दिए। कानपुर पहुंचने पर गुरुजी को सोफे पर बिठाया गया उनका पैर धुलकर सबने आशीर्वाद लिया। रात में खा पीकर जब सब सोने लगे तो शिष्य ने गुरुजी के बिस्तर के पास ही फर्श पर चटाई बिछाकर सो गया। सुबह शिष्य के लड़के ने कहा पापा यह कौन आदमी आए हैं, जो आपको न सोफा पर बैठने देते हैं, ना बेड पर सोने देते हैं। इस पर शिष्य ने अपने लड़के को समझाते हुए कहा कि बेटा यही वो देवता हैं, जिनकी वजह से आज मैं यहाँ हूँ। इन्होंने ही मुझे हिम्मत दी, इन्होंने ही मुझे सहारा दिया, वरना आज मैं पता नहीं कहाँ होता। ये हमारे भगवान हैं। और बेटा भगवान के बराबर तो भक्त नहीं बैठ सकता। इसलिए मैं नीचे ही बैठ जाता हूँ। मेरी जगह गुरुजी के चरणों में ही है, और मैं इसी में खुश हूँ। तबसे लेकर आजतक जब भी कभी वो अपने गाँव आते हैं, गुरुजी से मिलने अवश्य आते हैं और आज भी जमीन पर चटाई पर ही बैठते हैं।
बारम्बार प्रणाम है ऐसे गुरु को, ऐसे शिष्य को और ऐसे गुरु-शिष्य के रिश्ते को। निःसंदेह यह बता पाना मुश्किल है कि गुरु-शिष्य के रिश्ते में कौन बड़ा है। अतः यही कहना श्रेष्ठ है कि दोनों लोग एक दूसरे के पूरक हैं।
आर्टिकल राइटर - डॉ डी डी सिंह
ब्यूरो आज़मगढ़
आप सभी पाठकों को हमारे लेख कैसे लगे, अपनी राय कमेंट बॉक्स में अवश्य दें।
http://samacharindialive.blogspot.in
https://www.facebook.com/samacharindialive
समाचार इंडिया लाइव
ब्यूरो आज़मगढ़