रतनपुरा,
शिक्षा क्षेत्र रतनपुरा के दर्जनों विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम के नाम पर जम कर लुट मची हुई है ।सूत्रों की माने तो शासन के लाख फरमान के बाद भी आज दर्जनो गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय अंग्रेजी माध्यम के नाम पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। तथा किसान की जेब ढीली कर रहे हैं। इसका उदाहरण शिक्षा क्षेत्र रतनपुरा के दक्षिणांचल में चल रहे हैं कई ऐसे विद्यालय हैं जहां पर पुस्तकें खुलेआम विद्यालय पर ही उपलब्ध होती है और अध्यापक बंधुओं के द्वारा मनमाने रेट से पुस्तकों की बिक्री करते हैं। क्षेत्र के कम पढ़े लिखे लोग बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए किताबों को खरीदने के लिए विवश है । जुलाई के महीने में तो जमकर के शिक्षा विभाग द्वारा चेकिंग अभियान चलाया गया लेकिन समस्त आदेशों को शिक्षा विभाग के अधिकारी ठंडे बस्ते में रखे हुए हैं ।जिसके परिणाम स्वरुप शिक्षा क्षेत्र रतनपुरा में बहुत ऐसे विद्यालय हैं जिनकी मान्यता तक भी नहीं है ।और अंग्रेजी माध्यम के नाम पर पुस्तकों का विक्रय विद्यालय कर रहे है ।और यहां तक की एक बच्चे की फीस कम से कम 300 से ₹400 रूपए ,पुस्तक के मूल्य कम से कम 200 से 300 रूपए और नही तो अयोग्य अध्यापकों के द्वारा शिक्षा का कार्य कराते हैं। तथा इस पिछड़े इलाके में गरीब लोगों को आर्थिक रूप से तंगी के तरफ धकेलने का काम कर रहे हैं। यदि शासनादेश को ध्यान में नही रखकर जल्द से जल्द अभियान चलाकर के गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों का सूची तैयार कर कार्यवाही नहीं की गई तो क्षेत्र के गरीब जनता महंगी पुस्तकों को खरीदने के लिए मजबूर होगी, क्योंकि आज के समय में चाहे वह मजदूर वर्ग का हो या आर्थिक रुप से परिपूर्ण व्यक्ति हो सबकी इच्छा यही है कि हमारा बच्चा अच्छे विद्यालय में पढ़े और अच्छे शिक्षकों द्वारा शिक्षा प्राप्त करें जिसके चाह मे अनेक ऐसे विद्यालय हैं जो गांव में घूम-घूमकर जो बच्चा हिंदी मीडियम से पढ़ता है उनका भी नामांकन अंग्रेजी माध्यम से कर रहे हैं तथा महंगी पुस्तकों का वितरण कर रहे है। जिसको लेने के लिए अभिभावक विवश है। जिस तरह से मई माह में जुलाई के प्रथम सप्ताह में शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी किया गया छापेमारी की गई। अगर वह अभियान पुनः नहीं चला गया तो सैकड़ों की संख्या में अभिभावक इन जालसाजों के चक्कर में फंस जाएंगे जिससे न ही उनका बच्चा अच्छी शिक्षा पा सकता है और ना ही उसमें अच्छे संस्कार का प्रवेश हो सकता है बल्कि अभिभावक आर्थिक रूप से कमजोर हो सकता है। आज भी ऐसे विद्यालय हैं जो उत्तर प्रदेश सरकार से अस्थाई मान्यता तो प्राप्त किए हैं लेकिन हिंदी माध्यम से और उनका नाम बदल कर के अंग्रेजी माध्यम से विद्यालय का संचालन कर रहे हैं ।जो पूर्ण रुप से शिक्षा अधिनियम के विपरीत है और सैकड़ों बच्चे अपने भविष्य के साथ खेलने को विवश है। कई विद्यालय ऐसे हैं जिन के सामने मान्यता किसी और के नाम से हैं और बोर्ड और के नाम का लगा है इससे शिक्षा विभाग के लापरवाही का पर्दाफाश हो रहा है क्षेत्र के कई पढ़े लिखे लोगों ने यह शिकायत नाम छापे जाने के बात करके शिकायत किए ।
रिपोर्ट: ए के ह्यूमन