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संचार क्रांति के सदुपयोग के साथ दुष्परिणाम भी आ रहे हैं सामने।

झाँसी।

झाँसी मऊरानीपुर कहने को तो इस आधुनिक युग में हार्टटैक इंटरनेट का जमाना है। यानी कि 21वीं सदी मोबाइल क्रांति युग कहे तो कोई बात नहीं होगी। मगर क्या आप जानते हैं कि जिस तरीके से संचार क्रांति का सदुपयोग किया जा रहा है वह इसके कुछ दुष्परिणाम में सामने आ रहे हैं। सबसे अधिक इसकी गिफ्ट में युवा पीढ़ी ,महिलाएं,युवतियां के साथ-साथ नौनिहालों पर इसका गलत असर दिखाई दे रहा है।

 इस क्रांति में जिस तरीके से साधारण मोबाइल को काफी पीछे छोड़ दिया है। स्मार्ट फोन की तरह सभी वर्ग के लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है। इसमें फायदे के साथ-साथ नुकसान भी देखने को मिल रहा है। जहां पर बैठे हो मोबाइल पर दिन प्रतिदिन नए नए एप्स के माध्यम से संपूर्ण व्यापार, व्यवसाय, एजुकेशन ,पैकिंग सहित दर्जन काम संचलित का समय के साथ-साथ पैसों का सदुपयोग तो किया ही जा रहा है। साथ ही समस्त शासकीय योजना और उनसे जुड़े अधिकारी कर्मचारियों को एंड्रॉयड फोन के माध्यम से उपस्थिति के साथ साथ विभाग को समय समय पर जानकारी भेजने की व्यवस्था भी शासन द्वारा लागू की जा चुकी है। वहीं योजनाओं की सर्विस से संबंधित कार्यों में भी इंटरनेट के माध्यम से ही जानकारियां प्रेषित की जा रही है। यानी दो टूक शव्दों ने कहा जा सकता है कि नेट और स्मार्टफोन की माध्यम से सारी दुनिया को एक उंगली और कुछ इंचो में समाहित कर दिया गया है। यदि मोबाइल इंटरनेट से फायदा है तो नुकसान भी है। विगत समय की साजिशों का शिकार महिलाएं व युवतिया हो जाती है। तो वहीं नौनिहाल में ब्लू, व्हेल जैसी जानलेवा खेलों से कई घरों से चिराग बुझ चुके हैं। खासतौर पर उन जगहों पर यह स्थितियां देखने में आ रही है। जहां परिवार की अभिभावकों अपने बच्चों का दिनचर्या और क्रियाकलापों को नजर अंदाज करना और उनके प्रति अपने कर्तव्यों का सही रूप से निर्वहन ना होना। वर्तमान परिवेश में जिस तरीके से मोबाइल में ही दुनिया सिमट गई है इससे देखने में आ रहा है कि संयुक्त परिवार भी धीरे-धीरे विघटन की ओर तेज गति से बढ़ रहा है। जहां एक साथ बैठकर सभी सुख दुख की बातें करने वाले अब पास पास होकर भी किसी दूसरी दुनिया में ही अपने आप को व्यस्त किए हुए हैं। बुजुर्गों की इस मामले में एक ही राय है कि इस आधुनिक संसार क्रांति मैं स्मार्टफोन सुखद और दुखद परिणामों का पर्याय बन चुके हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक कहते हैं कि जिस तरीके से लोग मोबाइल का संपूर्ण समय उपयोग कर रहे हैं इससे ना केवल उनकी नेत्र ज्योति कम हो रही है बल्कि खूबसूरत आंखों में कई प्रकार के इंफेक्शन और रोग ग्रस्त हो रहे हैं। वही छोटे मासूम बच्चों को सिर दर्द,चक्कर आना, आंखों में जलन,आंखों की ज्योति कमजोर होना,आंखों में सूखापन आना,आंखों में जोर पड़ना, मोबाइल की किरणों से आंखों के पर्दे को नुकसान होना जैसी अनेक समस्याएं होने का डर बना रहता है। क्योंकि इसके उपयोग से बच्चों को विकास पर तो असर पड़ता ही है साथ ही मस्तिक, कैंसर, कान, और ब्रेन में टीयूपर , बच्चों में जिद्दी पन, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, व मोटाये जैसे गंभीर रोगों से ग्रासित,हो सकते हैं। साथ ही  सही दिशा को भूल कर अपराधिक प्रवृत्ति की और बच्चे का रुझान बढ़ने लगते हैं। जिसके चलते यह गलत कार्य करने में संकोच नहीं करते वही देखा जाए तो महिला और पुरुषों में सबसे अधिक मानसिक तनाव जैसी स्थितियां निर्मित हो रहे हैं। जबकि जानलेवा गेम में उलझ कर किशोरों द्वारा अपनी जान तक गंवा चुके हैं। वहीं माता पिता को अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए की कहां और किस काम के लिए इंटरनेट का उपयोग स्मार्टफोन में कर रहा है साथ ही समय-समय पर उनके स्मार्ट फोन में डाउनलोड किए गए एप्स की जांच पड़ताल भी करते रहना चाहिए। जिससे कि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। कि कहीं बच्चे गलत दिशा में तो नहीं जा रहे हैं। यदि गलत दिशा में जा रहे हैं तो उन पर तुरंत रोक लगाएं। अधिकांश देखने में आता है कि स्कूलों और कोचिंग से छूरते ही बच्चे मोबाइल लेकर व सुध से उधर अकेले कमरे में कैद होकर घंटों तक मोबाइल का उपयोग करते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं। ना उन्हें खाने पीने की फिक्र और ना ही किसी की का मैं बस अपनी दुनिया स्मार्टफोन को समझकर उसी के ही नसे में डूबे रहते हैं। जिसके चलते मानसिकता के साथ ही शरीर के विकास पर भी काफी असर पड़ता है। यदि इस और ध्यान नहीं दिया गया तो शरीर के साथ ही आंखों के मरीजों में काफी इजाफा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

रिपोर्ट: अखिलेश राज

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