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खसरा रूबेला टीकाकरण के लिए की गई बैठक।

आज़मगढ़।

मनोज चतुर्वेदी ब्यूरो प्रभारी सगड़ी आजमगढ़।

शत प्रतिशत टीकाकरण के लिए दिया गया जोर।

सगड़ी। 

सगड़ी तहसील क्षेत्र के बीआरसी केंद्र अजमतगढ़ में खसरा रूबैला (एम.आर.) टीकाकरण अभियान के लिए एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें अजमतगढ़ ब्लॉक के परिषदीय विद्यालयों के प्राथमिक एवं जूनियर विद्यालय के प्रधानाध्यापकों ने प्रतिभाग किया ।इस दौरान बैठक में बीएमसी गुलशन आरा ने बताया खसरा रूबैला के लिए अभियान चलाया जा रहा है। 

जिसके लिए 9 माह से लेकर 15 वर्ष तक के आयुवर्ग के बच्चों को राष्ट्रीय एम आर अभियान के तहत सिंगल शाट के रुप में टीका लगाया जायेगा। इसके लिए एक तिथि निर्धारित की जाएगी जिसके तहत हर विद्यालयों में टीकाकरण किया जाएगा। आगे उन्होंने बताया हमारे देश में खसरा रूबैला के अधिकतर मामले 15 वर्ष तक के बच्चों में पाए गए हैं ।यही कारण है कि इस अभियान में बच्चों के इस आयु वर्ग  को लक्ष्य बनाया गया है ।इस अभियान के माध्यम से सभी स्कूलों ,समुदायों, सरकारी अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों पर चलाया जाएगा।

एक ही टीका से खसरा और रूबेला से बचा जा सकता है।


खसरा रोग क्या है तथा कैसे फैलता है?

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खसरा एक जानलेवा हो गई जो वायरस से फैलता है। खसरा रोग के कारण बच्चों में विकलांगता या उनकी का असमय मृत्यु हो सकती है।

 खतरे के लक्षण क्या हैं?

 खतरा एक बेहद संक्रामक रोग है। इससे प्रभावित व्यक्ति के खासने या छीकनें से फैलता है। सामान्य तौर पर खसरे के लक्षण है - चेहरे तथा शरीर पर गुलाबी लाल दाने या चकत्ते , अत्यधिक बुखार , खांसी , नाक बहना और आंखो का लाल हो जाना ।इससे बचने के लिए टीकाकरण एक उपाय है।

रूबैल्ला के लक्षण क्या हो सकते हैं ?

बच्चों में यह रोग आमतौर पर हल्का होता है जिसमें खारिश , कम डिग्री का बुखार , मिचली और हल्के नेत्र -शोध (कंजेक्टिविटीज) के लक्षण दिखाई पड़ते हैं ।कान के पीछे और गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियां सबसे विशिष्ट चिकित्सीय लक्षण हो सकते हैं। संक्रमित वयस्क ज्यादातर महिलाओं में जोड़ों में पीड़ा हो सकती है ।यह वायरस लड़के और लड़कियों दोनों को संक्रमित कर सकते हैं।

यदि कोई स्त्री गर्भावस्था के आरंभ में ही रूबैल्ला वायरस से संक्रमित हो गई हो तो इसका क्या परिणाम होता है?

गर्भावस्था में आरंभ में रूबेला वायरस से संक्रमित हो गई स्त्री में जन्मजात रुबैला सिंड्रोम (सीआरएस) विकसित हो सकता है जो उसके गर्भ से पलने वाले भ्रूण और नवजात शिशु के लिए बेहद गंभीर हो सकता है। इनमें से बहुत से लोग जीवनभर के लिए विकलांग बना सकते हैं जिनके उपचार्य शल्य चिकित्सा आदि पर बहुत अधिक धन व्यय करना पड़ता है। इस संक्रमण के कारण गर्भपात , समय पूर्व प्रसव  या मृत शिशु का जन्म आदि हो सकता है।

जन्मजात रूबैल्ला सिंड्रोम ( वी आर एस) क्या है?

जन्मजात रूबैला (सी आर एस) के कारण बहुत से रोग विशेषकर आंखों (ग्लूकोमा, मोतियाबिंद) कानो ( सुनने की शक्ति खत्म होना) मस्तिष्क (माइक्रोसिफ्ली , मानसिक विकास में अवरोध ) तथा हृदय को प्रभावित कर सकते हैं। सीआरएस से बचाव इस आयु वर्ग के बच्चों को यह टीका लगवा कर किया जा सकता है ।

क्या रूबेला रोग का कोई इलाज है?

रूबैल्ला के उपचार के लिए कोई निश्चित इलाज नहीं है इस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण ही एकमात्र उपाय है।

 साथ ही उन्होंने सभी शिक्षकों से टीका करण अभियान में सहयोग देने की अपील की।

 एबीआरसी डॉक्टर हरिकेश मिश्र , कमलनयन यादव , अनिल कुमार मिश्र, कुसुम पांडेय आदि लोगों ने सुझाव दिए। इस मौके पर प्रदीप प्रजापति,  विजय प्रजापति ,राजेन्द्र मौर्य , राजमणि शर्मा , दीपचंद प्रसाद, राम सिंह ,राधिका देवी, विमल प्रकाश, विद्यावाचस्पति राही , महेन्द्र यादव , राजेश राय सहित  ब्लाक समस्त प्रधानाध्यापक मौजूद थे।

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