आज़मगढ़।
सरायमीर. सुफफतुस सालेहात मदरसा इस्लामिया अरबिया बैतूल उलूम सरायमीर के वार्षिक समारोह का कार्यक्रम तीन चरणों में हुआ प्रथम चरण में सुफफतुससालेहात की बालिकाओं ने उर्दू हिंदी अंग्रेजी में भाषण तथा उर्दू में एक मनमोहक संवाद प्रस्तुत किया जिसकी अध्यक्षता प्रधानाचार्या तस्लीम फातिमा ने तथा संचालन सादिया बानो ने की कार्यक्रम के दूसरे चरण में बच्चों ने उर्दू हिंदी अंग्रेजी भाषाओं में भाषण दिए तथा अति उत्तम कविताएं पढ़ी कार्यक्रम का तीसरा चरण मौलाना मोहम्मद शफीक अहमद की अध्यक्षता में हुआ जिसमें मौलाना महबूब आलम ने वार्षिक सम्मेलन के भाषण में बोलते हुए कहा कि मदरसे के इस वार्षिक सम्मेलन में महिलाओं को दीन का ज्ञान दिया जाता है नमाज एवं जीवन व्यतीत करने का ढनग बताया जाता है मां का महत्व बताते हुए कहा कि नेक मां की कोख से खालिद बिन वलीद जैसे बहादुर व्यक्ति जन्म लेते हैं मौलाना शफीक अहमद बिजनौरी ने कहां की किसी मनुष्य का इतिहास औरत के बिना अधूरा है और बताया की अपनी पत्नी के त्याग से ही हजरत हनज़ला रजि अल्लाहुअनह का इस्लाम में एक मकाम है व्यक्तित्व के निर्माण में मां की भूमिका का बहुत महत्व बताया और कहा कि घर और समाज में दिन दारी लाने के लिए औरत का दीनदार होना बहुत आवश्यक है मदरसा के प्रबंधक मुफ्ती अहमदुललाह ने कहा की बच्चों के पालन पोषण एवं शिक्षा में मां की नियत केवल अल्लाह के लिए होनी चाहिए और कहा कि वास्तव में मा ही अपने बच्चे को दीनदार बना सकती है संसार में परेशानी का आना दिन पर अमल न करने के कारण होता है मोबाइल का गलत प्रयोग समाज को बिगाड़ने का सबसे बड़ा साधन है उन्होंने बताया अच्छे समाज का निर्माण केवल नेक महिलाओं की उपस्थिति से ही संभव है इस कार्यक्रम का संचालन मुफ्ती मोहम्मद शाकिर मदनी ने की अंत में मुफ्ती अहमदुललाह के दुआ पर कार्यक्रम समाप्त हुआ, पूरा कार्यक्रम बड़ी शांति एवं सदभावना पूर्वक मुफ्ती अजवदुल्लाह फुलपूरी के देखरेख में संचालित हुआ,
मोहम्मद यासिर सरायमीर