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दस्तकारों तथा परम्परागत कारीगरों के विकास हेतु विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना संचालित की गयी है।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आजमगढ़ 02 मई-- उपायुक्त उद्योग प्रवीण कुमार मौर्य ने सर्वसाधारण को सूचित किया है कि प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के स्थानीय दस्तकारों तथा परम्परागत कारीगरों के विकास हेतु विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना संचालित की गयी है। इस योजना के अन्तर्गत पारम्परिक कारीगरों जैसे बढ़ई, दर्जी, टोकरी बुनकर, नाई, लोहार, कुम्हार, हलवाई, राजमिस्त्री आदि हस्तशिल्पियों के आजीविका के साधनों का सुदृढीकरण करते हुए उनके जीवन स्तर को उन्नत किया जायेगा। 
उक्त योजना के माध्यम से उपरोक्त क्षेत्र के व्यक्तियों को 6 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यकम दिये जाने का प्राविधान है। प्रशिक्षण पूर्णतः निःशुल्क एवं आवासीय होगा। प्रशिक्षण अवधि में श्रम विभाग द्वारा समय-समय पर जारी अर्धकुशल श्रमिक के मजदूरी दर के समान दर पर मानदेय प्रदान किया जायेगा। सेवा/व्यवसाय के सफल संचालन हेतु आधुनिकतम तकनीक पर आधारित उन्नत किस्म के टूल किट का वितरण कौशल वृद्धि प्रशिक्षण कार्यक्रम के उपरान्त सभी प्रशिक्षणार्थियों को किया जायेगा। 
उक्त योजनांतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हो। आवेदक की न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष है एवं उपरी सीमा का कोई निर्धारण नही है। आवेदक पारम्परिक कारीगरी जैसे बढ़ई, दर्जी, टोकरी बुनकर, नाई, लोहार, कुम्हार, हलवाई, राजमिस्त्री अथवा दस्तकारी आदि व्यवसाय से जुड़ा होना चाहिये। परिवार का केवल एक सदस्य ही योजनांतर्गत आवेदन हेतु पात्र होगा। परिवार का आशय पति अथवा पत्नी से है। योजनांतर्गत पात्रता हेतु जाति एक मात्र आधार नही है। योजनांतर्गत लाभ प्राप्त करने हेतु ऐसे व्यक्ति भी पात्र होंगें, जो परम्परागत कारीगरी करने वाली जाति से भिन्न हों। 
उन्होने बताया कि योजनांतर्गत लाभ प्राप्त करने हेतु लाभार्थियों द्वारा अपना आवेदन पत्र diupmsme.upsdc.gov.in  पर दिनांक 25 मई 2020 तक आनलाईन कर सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी हेतु कार्यालय उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र आजमगढ के मोबाइल नं0-8172962782 से सम्पर्क किया जा सकता है।
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