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धोनी होना आसान नहीं, डॉ० अखिलेश चन्द्र
लेख: मैं पल दो पल का शायर हूँ पल दो पल मेरी कहानी है फ़िल्म 'कभी-कभी'के मुकेश कुमार की आवाज में गाये गीत के साथ महेंद्र सिंह धोनी ने भारतीय क्रिकेट से जब सन्यास लिया तो सभी क्रिकेट प्रेमियों को बहुत बड़ा आघात लगा और फिर लोगों ने अपने आप को समझाना शुरू किया कि जिस गीत के साथ धोनी ने सन्यास लिया है शायद वो उस गीत के माध्यम से यह कहना चाहते हैं कि यहाँ कोई भी हमेशा के लिए नहीं आया है कोई किसी भी फील्ड में रहें उसे एक न एक दिन अपने भावी पीढ़ी को सब सौपना पड़ता है और धोनी ने भी यही किया।
भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी (2011)ने भारत के लिए विश्व कप,कैप्टन कपिल देव (1983) के बाद जीत कर देने वाले दूसरे कप्तान के रूप में धोनी को हमेशा याद किया जाएगा।धोनी के कप्तानी में भारत ने 20-20 विश्व कप भी जीता ।यह भारतीय क्रिकेट के इतिहास के लिये बहुत भावुक पल है।धोनी विश्व क्रिकेट में अपने विकेट कीपिंग और बल्लेबाजी में हेलीकॉप्टर शॉट के लिये बहुत मशहूर क्रिकेटर हैं।धोनी को मिस्टर कूल ,और माही भी कहा जाता है।धोनी ने भारतीय क्रिकेट के हर श्रेणी में मैच खेला।धोनी के क्रिकेट से प्रेरित होकर सुशांत सिंह राजपूत के अभिनय में "एम.एस. धोनी.द अनटोल्ड स्टोरी'नाम से फ़िल्म भी बनी।इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता पायी।इसी फिल्म से सुशांत सिंह राजपूत की फ़िल्मी दुनियां में पहिचान बनी।धोनी का क्रिकेट भारत में हमेशा युवाओं को प्रेरित करेगा।धोनी ने क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के साथ भी लम्बा खेल खेला।उनके सन्यास पर पूर्व कप्तान विराट कोहली ने कहा -'धोनी दुनियां के सफल कप्तानों में से एक है।'धोनी ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में 20-20 मैच (2007) ,वन डे मैच (2011)एवं टेस्ट मैच (2013)में विश्व कप भारत के लिये जीता।
धोनी जी आपने क्रिकेट से सन्यास लिया है हम सब के दिल मे आपका भारत को दिया गया योगदान हमेशा सुनहरे रुप मे दर्ज है।मैं व्यक्तिगत रूप से अभी आपको और खेलता देखना चाह रहा था पर समय का अपना लेखा-जोखा होता है।आपने जो निर्णय लिया उससे हम लोग खुश भी हैं क्योंकि अपने कैरियर के शीर्ष पर रहते हुये सन्यास लिया यह फैसला आपका सही है।धोनी ने कुल 90 टेस्ट मैच,350 वन डे मैच और 98 ट्वेंटी -ट्वेन्टी मैच खेले।
धोनी के सन्यास पर देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह ने कहा-आपका योगदान भारत के लिये हमेशा यादगार रहेगा।आप आगे भारतीय क्रिकेट को बेहतर बनाने के लिये हमेशा अपना योगदान देते रहें।भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान श्री सौरव गांगुली ने कहा -धोनी के साथ भारतीय क्रिकेट के एक युग का अंत हुआ ।पूर्व कप्तान श्री सचिन तेंदुलकर ने कहा-आप भारत के सबसे सफल कप्तान हैं।आपके साथ खेलते हुए हमने 2011 में अपने जीवन का सबसे बड़ा विश्वकप का सपना पूरा किया।
धोनी के अचीवमेंट के लिये भारतीय थल सेना ने उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से सुशोभित किया है।भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार के साथ-साथ पदम् भूषण सम्मान से भी सम्मान्नित किया है।
भारतीय क्रिकेट में एक वाक्य का चलन 'माही मार रहा है'का सूत्रपात धोनी के नाम दर्ज है।क्रिकेट के इतिहास पर यदि नजर डालें तो बहुत से कप्तान जो विकेट कीपर रहें हैं उन्होंने बड़ी सफलता पायी है, धोनी भी उन्हीं में शामिल हैं पर धोनी की मन्जिल रुकने वाले कैप्टन की नहीं थी।भारतीय क्रिकेट टीम में कैप्टन की एक लंबी सूची है जैसे सुनील गावस्कर,दिलीप वेंगसरकर, रोजर बिन्नी,मदनलाल, कपिलदेव,रवि शास्त्री,सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग,सौरभ गांगुली,राहुल द्रविण सब अपने आप में अलग थे पर धोनी उन सबमें सबसे अलग हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम हो या विश्व क्रिकेट टीम अब खिलाड़ी का चयन किसी एक गुण के कारण हो अब यह कल की बात हो गयी अब अगर आपको टीम में रहना है तो आलराउंडर होना पड़ेगा और धोनी ने यह बात पहले ही जान ली थी।धोनी हर फील्ड के माहिर हैं।जिस तरह धोनी का एक नाम माही है ठीक उसी प्रकार वो क्रिकेट के हर मामले में माहिर हैं।मैंने अपनी जिंदगी में विकेट के पीछे इतनी दूर डाइव मार-मार कर कैच पकड़ता विकेट कीपर अभी तक नही देखा था।धोनी की तरह का चुस्त और दुरुस्त संवेदनशील बल्लेबाज भी नही देखा था ।मैच जीतने का जुनून जो धोनी में रहा है वह भी काबिलेतारीफ है।जब तक धोनी पिच पर हैं मैच विपक्षी के हाथ से छीन लाने का माद्दा जीवित रहा।एक ओवर में 36 रन भी चेज करना हो तो भी भारतीय दर्शकों में धोनी के रहते उम्मीद नही टूटती थी, हॉलाँकि कभी ऐसा पल आया नहीं।यह खिताब तो भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज युवराज सिंह के नाम दर्ज है।धोनी की जोड़ी हर बल्लेबाज के साथ ऐसे बैठती थी जैसे धोनी उसी के लिये बने हैं।
बल्लेबाजी में धोनी के आस-पास भी उनके स्टाईल का कोई नही है।हेलीकॉप्टर शॉट लगाने वाले वो दुनियां के इकलौते बल्लेबाज हैं और शायद आखिरी भी।गेंद को गेंद के दिशा में मूव कर देना धोनी की खासियत रही हैं।
मैं एक चीज से हमेशा इत्तेफाक रखता रहा कि एक अच्छा विकेटकीपर एक अच्छा बल्लेबाज हो सकता है क्योंकि जब भी वो विकेट कीपिंग करता है तो स्टम्प के पीछे गेंद की आती दिशा पर उसकी निगाह गड़ी रहती है और वो बहुत पेशेंस से गेंद को हाथ के ग्लब्स में कैप्चर करता है।बल्लेबाजी करते वक्त वही पेशेंस और गेंद की नजर काम आती है और गेंद और बल्ले का सम्बंध सटीक बैठता है और गेंद बल्लेबाज के इसारे पर बाउंड्री के अंदर जमीन पकड़ती या कभी ऊपर से 4 या 6 रन में तब्दील होती रहती है।धोनी के बल्लेबाजी का रीटेक देखे तो आपको लगेगा धोनी ताकत से नही टेक्निक से बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी हैं।
क्रिकेट में जो भी खिलाड़ी टेक्निक से खेलेगा वो थकेगा भी नही और जल्दी आउट भी नही होगा, धोनी ने यही किया।धोनी के खेल के तरीके से आने वाली पीढ़ी को सीखना चाहिए।
आज की टेक्नोलॉजी का उपयोग करके मैच की रिकॉर्डिंग देखकर युवाओं को नई सीख दी जा सकती है।
धोनी की हमसफ़र साक्षी ने भी धोनी के निर्णय में हमसफ़र बनकर बखूबी साथ दिया।धोनी के सन्यास पर साक्षी ने कहा -'सन्यास के लिये धोनी ने आसुओं को कितना दबाया होगा या छुपाया होगा'मैं भी इससे पूरी तरह से सहमत हूँ क्योंकि जिंदगी में बहुत कुछ छोड़ा जा सकता है पर जिसकी जिंदगी ही क्रिकेट हो उसे जब क्रिकेट को छोड़ना हो तो बिल्कुल उसी भावना से गुजरेगा जिससे धोनी गुजरे होंगें और साक्षी ने जिसका इजहार किया।
हम सभी धोनी के सन्यास को सलाम करते हैं और उन्हें उनके भावी जीवन के लिये स्वस्थ, दीर्घायु रहने की बहुत बहुत शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं।
लेखक- डॉ0 अखिलेश चन्द्र
आजमगढ़।