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महिला सशक्तिकरण की दिशा में बढ़ता एक सार्थक कदम समूह से समृद्धि की ओर: जिलाधिकारी

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आजमगढ़ 23 सितम्बर-- जिलाधिकारी राजेश कुमार ने बताया है कि भारत सरकार के सहयोग से उत्तर प्रदेश में “राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’’ का क्रियान्वयन ग्राम्य विकास विभाग उ0प्र0 की एक स्वायत्त संस्था, ‘‘उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’’ द्वारा किया जा रहा है। उन्होने बताया कि आजीविका मिशन का उद्देश्य जमीनी स्तर पर ग्रामीण निर्धन परिवारों की महिलाओं के सशक्त एवं स्थायी संस्थायें बनाकर आजीविका के अवसरों को प्राप्त करने में समर्थ बनाते हुए गरीबी को कम करना है। 
उन्होने कहा कि सामाजिक एकजुटता/क्षमता विकास हेतु सभी ग्रामीण निर्धन परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करना, समूह में कम से कम 10 महिला एवं अधिकतम् 20 महिला होंगी। महिलाओं के 10-15 स्वयं सहायता समूहों को मिलकर ग्राम संगठन एवं ग्राम संगठनो को संकुल स्तर पर संघ में संगठित करना तथा सामुदायिक संस्थागत ढांचे को लगातार क्षमता विकास के माध्यम से सशक्त एवं आत्म निर्भर बनाना है। सामाजिक समावेशन/सामाजिक विकास हेतु समाज के उपेक्षित वर्गो जैसे अनुसूचित जातियां/जनजातियां, विकलांग, अल्पसंख्यक आदि को विशेष रूप से परियोजना में शामिल करते हुए उन्हें सशक्त बनाना तथा आवश्यकता के आधार पर उपेक्षित वर्गो के सर्वांगीण विकास के लिए विशेष परियोजना का संचालन करना है। वित्तीय समावेशन हेतु सभी समूह एवं संगठन का बैंक में खाता खुलवाना एवं बैंक की समस्त सुविधाएं उपलब्ध करवाना, सभी योग्य समूहों को रू0 15000 का रिवाल्विंग फण्ड (चक्रीय पूंजी) एवं रू0 1.10 लाख तक का सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) की सुविधा तथा समूहों को सीसीएल (बैंक क्रेडिट लिंकेज) में इंटरेस्ट सबवेंसन के माध्यम से जनपद में रू0 500000 तक 7 प्रतिशत व्याज पर ऋण उपलब्ध कराना एवं समय से ऋण जमा करने पर व्याज में छूट देना है।
जिलाधिकारी ने बताया कि योजना के आरम्भ से अबतक समस्त विकास खण्डों के अन्तर्गत 9708 समूहांे का गठन, 7210 खाता खुला, 4230 समूह स्टार्टअप, 6196  रिवाल्विंग फण्ड, 1360 बैंक क्रेडिट लिंकेज, 4228 सीआईएफ, 395 वीओ, 246 वीओ स्टार्टअप, 162 वीआरएफ, 95 लाइवलीहुड फण्ड तथा 19 सीएलएफ की प्रगति हुई है।
उन्होने बताया कि आजीविका को प्रोत्साहन देने हेतु चयनित परिवारों में मौजूदा आजीविका के विकल्पों को बढाना व उनका विस्तार करना है। महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के माध्यम से विकास खण्ड ठेकमा में 50 कृषि सखी एवं 49 पशु सखी के माध्यम से 3500 महिला किसानों को कृषि एवं पशुपालन सम्बन्धी प्रशिक्षण देते हुए उनके आजीविका संवर्धन को बढावा दिया जा रहा है, इसी प्रकार अन्य विकास खण्ड बिलरियागंज, मेंहनगर, मार्टीनगंज, लालगंज, मुहम्मदपुर एवं तरवां में आजीविका सखी का चयन करते हुए महिला किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को उनके कौशल को बढ़ाने हेतु कौशल आधारित प्रशिक्षण आरसेटी, यूपीएसडीएम, उद्यान विभाग, पशुपालन विभाग तथा अन्य के माध्यम से हुनरमंद मजदूरी एवं लाभप्रद रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। जिसके क्रम में विगत वित्तीय वर्ष में 1260 लोगों को सिलाई, अचार मुरब्बा, मसाला, एलईडी बल्ब, झाडू निर्माण तथा आर्टीफिसियल ज्वैलरी एवं कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर आजीविका संवर्धन कराया गया है। 70 लाख सोलर लैम्प परियोजना अन्तर्गत जनपद में 35200 सोलर लैम्प का वितरण किया गया है तथा इन लैम्पों के रिपेयर एवं मेन्टीनेन्स के लिए 11 रिपेयरिंग एवं मेनटेनेन्स सेन्टर विकास खण्ड ठेकमा में संचालित है, जिसमें उक्त दुकानों से सोलर आधारित अन्य उपकरणों की बिक्री भी की जा रही है। विकास खण्ड ठेकमा में ऋतु आधारित समूह द्वारा मशरूम, गेंदा का फूल, जैविक कीटनाशक तथा जैविक चावल का उत्पादन किया जा रहा है। शुरूआती ग्रामीण उद्यमिता कार्यक्रम राष्ट्रीय रिसोर्स संगठन कुडुमश्री के माध्यम से विकास खण्ड ठेकमा में प्रारम्भ की गयी है, जिसमें आगामी 04 वर्षों में कुल 1398 उद्यमों को तकनीकि एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते हुए आजीविका संवर्धन किया जाना है।
जनपद स्तर पर कुल 252 स्वयं सहायता समूहांे की 512 दीदीयों द्वारा अब तक 193500 मास्क तैयार कर बिक्री की गयी है। अब तक कुल 5317 सीआईबी बोर्ड की मांग के सापेक्ष 2326 सीआईबी बोर्ड की आपूर्ति स्वयं सहायता समूहों/ग्राम संगठन के माध्यम से सुनिश्चित किया गया है। मनरेगा के अंतर्गत समूह की महिलाओं को मेठ, बच्चे खिलाने, पानी पिलाने हेतु चिह्नित कर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है। जॉब कार्ड धारक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मनरेगा के अंतर्गत कार्य में संलिप्त कर रोजागर दिया जा रहा है। ग्राम संगठन/स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मनरेगा के अंतर्गत सृजित परिसंपत्तियों पर जन सूचना बोर्ड (सीआईबी बोर्ड) जनपद के कुल 30 स्वयं सहायता समूहों/ग्राम संगठन के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित कराया जा रहा है। जनपद के समस्त 22 विकास खण्डों में स्वयं सहायता समूह द्वारा प्रेरणा कैन्टीन का संचालन किया जा रहा है।

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