आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आजमगढ़ 13 अक्टूबर-- गोपाल दास गुप्ता उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) आजमगढ़ मण्डल ने अवगत कराया है कि-- धान की देरी से रोपी गयी विशेष कर संकर (हाइब्रिड) प्रजातियों के अलावा जल भराव वाले खेतों में कण्डुवा रोग लग रहा है। कण्डुवा रोग बहुत ही हानिकारक रोग है। इस रोग के लक्षण बाली निकलने के बाद प्रकट होते हैं, बालियों के दानें शुरूआत में गहरे पीले पड़ते हैं, बाद में फूलकर काले रंग के हो जाते हैं। हाथ से दाने को छूने पर हाथ में पीले अथवा काले रंग के पाउडर जैसे रोग के स्पोर लग जाते हैं।
उन्होने बताया कि यह रोग एक बीज जनित बीमारी है, अतः बुवाई से पूर्व कार्बेण्डाजिम की 2 ग्राम या ट्राइकोडर्मा की 5 ग्राम मात्रा से प्रति कि0ग्रा0 बीज का शोधन करने के उपरान्त बुआई करना चाहिए। यूरिया का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। प्रमाणित एवं रोग प्रति रोधी किस्मों का चयन करना चाहिए। वर्तमान में किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि अपनी फसल की सतत निगरानी करते रहें, यदि बीमारी से ग्रसित पौधें दिखाई दें तो तुरंत प्रभावित पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर दें व खेत से पानी निकाल दे तथा प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ई0सी0 की 200 मि0ली0 या कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू0पी0 की 200 ग्राम मात्रा को 200 ली0 पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें, आवश्यक होने पर 8-10 दिन बाद दोबारा छिड़काव करना चाहिए।
फसल सुरक्षा की अधिक जानकारी अथवा अन्य किसी समस्या के समाधान हेतु किसान भाई अपने विकास खण्ड स्थित कृषि रक्षा इकाई के प्रभारी से अथवा उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) आजमगढ़ मण्डल से मो0न0 9415592498 पर संपर्क कर सकते हैं।
