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आजमगढ़ जिले के महराजगंज क्षेत्र स्थिति देवारा जदीद भीषण अग्नि कांड की तथ्यपरक जमीनी रिपोर्ट व मांग पत्र।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आज़मगढ़: आज़ादी के 73 साल बाद भी गांवों के देश भारत की वास्तविक स्थिति की पोल समय समय पर खुलती रहती है।इसी क्रम में दिनांक 11 अप्रैल 2021 को आज़मगढ़ जिले के सगड़ी तहसील के महराजगंज क्षेत्र के नौबरार देवारा जदीद किता प्रथम के रतन के पुरवा में दोपहर अचानक आग लगती है और लगभग 100 परिवारों का आशियाना बिल्कुल उजड़ जाता है।

एक गरीब मजदूर परिवार राकेश के दो बच्चे- मुस्कान(5वर्ष) व अवनीश(3वर्ष) अपने ही मड़ई में जिंदा जल गए।साथ ही गांव के तमाम लोग आग बुझाने में झुलस गए।जिसमें 3 की हालत खराब बताई गई।

भयंकर आग की चपेट में 300 से अधिक मड़ई,सैकड़ों बीघे के उपर की फसल(कुछ खड़ी फसल, कुछ बोझ बन्धे हुए),घर में रखे कई क्विंटल अनाज सब जलकर खाक हो गए।जिसकी भयावहता संलग्न तस्वीरों में देखी जा सकती है।
ग्राउंड लेवल की वास्तविक रिपोर्ट लेने के लिए  किसान संग्राम समिति,जनवादी लोक मंच,अखिल भारतीय प्रगतिशील छात्र मंच,आज़मगढ़ का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल सामयिक कारवां के वरिष्ठ संवाददाता के साथ घटना स्थल पर गया और गांव के प्रत्येक पीड़ित परिवार से मुलाकात कर वास्तविक स्थिति को जानने का प्रयास किया।

समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में पाया कि गांव के किसी भी व्यक्ति का घर तक में रखा एक छटाँक अनाज भी न बचा,शरीर के अलावा सभी कपड़े व बर्तन,बिस्तर, चारपाई,इंजन,थ्रेसर,चौकी,छोटे बड़े जेवरात सहित अपने लड़के- लड़कियों की शादियों के लिए संजो कर रखे गए आवश्यक समान जल कर खाक हो गए।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने हमें बताया कि आवंटित आवास के नगद पैसे तथा दवा-ईलाज,पढ़ाई,घर का खर्च,घर की मरम्मत,शादी आदि के लिए रखे बचत के कुल मिलाकर लाखों रुपये भी जलकर खाक हो गए।

आग कितनी भयानक रही होगी इसका अनुमान सबसे तेज दौड़ने वाले साँप जैसे जानवर के आग में झूलसकर मर जाने व हूबहू उसी तरह पड़े उसके मृत शरीर को तस्वीरों से समझा जा सकता है।

ग्रामीणों ने हमें बताया कि :-

1) गांव के पात्र व्यक्तियों को अगर समुचित स्थान व सही समय पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला होता तो जान-माल की इतनी बड़ी क्षति नहीं हुई होती।

2)आपातकालीन सहायता जैसे अग्निशमन यंत्रों के काफी विलम्ब से पहुँचने पर भी ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति जताई।

3)सरकार और प्रशासन की तरफ से मिल रही नाकाफी सुविधाओं से ग्रामीणों में काफी दुःख और गुस्सा व्याप्त है।

4)चुनावी राजनीतिक दल (विशेष रूप से सत्ताधारी)अपनी-अपनी राजनीतिक विसात बिछाते हुए आपदा को अवसर में बदलने की होड़ में दिखाई दिए।

5) जान माल की हुई भयंकर क्षति का यथाशिघ्र मजिस्ट्रेट स्तर की जांच कराकर सभी पीडित परिवारों को उनके हुई सभी क्षति के आधार पर पूर्ण आर्थिक सहायता 24घंटे के अंदर उपलब्ध कराई जाए।जिसमें प्रमुख रूप से घटना में मरे हुए बच्चों के माता-पिता व परिवार के जीवन निर्वाह की गारंटी सरकार को लेनी चाहिए।

ग्रामीणों की मांग में अपनी मांग को जोड़ते हुए समिति सरकार और प्रशासन से यथाशिघ्र समुचित कार्यवाही की मांग करती है कि--

1) सभी पीड़ितों को उनके नुकसान की क्षतिपूर्ति,समुचित आर्थिक सहायता,मृत बच्चों के परिवार के जीवन निर्वाह की गारंटी लेने सहित घायलों का पूर्ण इलाज कराया जाए।

2)लोगों के रहने-खाने व पशुओं के चारे की पूरी व्यवस्था का तात्कालिक व स्थायी प्रबंध किया जाए।

3) भीषण धूप-गर्मी-लू आदि से सभी ग्रामीणों सहित छोटे बच्चों को बीमार होने से बचाने के लिए तात्कालिक तौर पर आशियाने का निर्माण व दीर्घकालिक स्थायी आवास की व्यवस्था की जाए।

4)भीषण अग्नि कांड पीड़ितों के खेती-किसानी के सभी कर्ज को माफ किया जाए।

5)न्यूनतम 1 साल तक उनके रहने-खाने की उचित सामग्री और खेती-किसानी के लिए जरूरी सभी संसाधनों जैसे बीज,खाद,बिजली आदि को पूर्ण रूप से मुफ्त प्रदान किया जाए।
उपरोक्त मांग सहित इस तरह की आपदाओं(बाढ़,आग)की पुनरावृत्ति को हमेशा के लिए रोकने हेतु किसी ठोस स्थायी योजना के शीघ्र क्रियान्वयन की मांग समिति करती है।

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