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गरीब के सर से छत छीनने में लगी राजस्व विभाग, तो वहीं पुलिस महकमे द्वारा सितम ढाने का गरीब परिवार ने लगाया आरोप।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आज़मगढ़:  - जहां केंद्र तथा राज्य सरकार गरीबों को छत देने की मुहिम में लगी है, तो वहीं राजस्व विभाग व  पुलिस महकमा एक गरीब परिवार को बेघर होने के लिए मजबूर कर रहा है। मामला कप्तानगंज थाना क्षेत्र के भवानी पट्टी का है,  जहां लवटु विश्वकर्मा और उसके परिवार पर राजस्व विभाग और कप्तानगंज पुलिस दोनों ने अपनी भृकुटी तान कर शनि की साढ़ेसाती के समान व्यवहार करने कर रहे हैं | बता दें कि लवटु  विश्वकर्मा को उसके भाई पाटीदार आपसी बंटवारे में आबादी से बाहर बंजर की जमीन को अपनी आबादी बता कर दे दिया,  जिस पर लवटु के पिता ने 45-50 वर्ष पहले झोपड़ी बनाकर रहने लगे, जबकि उसके भाई पाटीदार आबादी की जमीन पर खुद काबिज हो गए| लवटू के पांव के तले जमीन तक खिसक गई, जब राजस्व विभाग की नींद 45-50 वर्ष बाद खुली  और परिवार को बंजर की जमीन खाली करने के लिए नोटिस जारी कर दिया| जिसपर लवटू अपने भाई पट्टीदारों से सारी बात बताते हुए आबादी में अपना और अपने परिवार के लिए सर छुपाने हेतु जमीन मांगने लगा |जिस पर भाई पट्टीदारों ने मना करते हुए आबादी में बची जमीनों पर निर्माण कार्य कराने लगे | लवटू  जब गुहार लगाकर थक गया तो उसने पुलिस प्रशासन की शरण में  जाने का निश्चय किया| लवटू और उसके लड़के अनिल का कहना है कि पहले तो पुलिस ने निर्माण कार्य को रोकते हुए हम दोनों पक्षों को आपसी बातचीत कर मसले को सुलझाने को कहा| परंतु अचानक एक-दो दिन में कौन सा कारनामा हुआ कि दोनों पक्षों को बुलाकर पहले तो बंद कर दिया बाद में विपक्षी भाई पट्टीदारों को छोड़ते हुए  निर्माण कार्य शुरू करा दिया तथा लवटू  को मारपीट कर बंद कर उसका मोबाइल फोन भी रख लिया |जो अभी भी पुलिस के पास है | लवटू  और उसके लड़के का यह भी कहना है कि- कप्तानगंज थाने के उपनिरीक्षक कृष्णानंद व प्रभारी निरीक्षक देवानंद दोनों लोग थाने पर अपनी गुहार लेकर जाने पर गाली देते हुए बंद करने की बात कह कर भगा देते हैं | जिससे लवटू का परिवार डरा हुआ है,  और न्याय की आस में दर-बदर  भटक रहा है |देखना यह है कि कब तक राजस्व विभाग व  कप्तानगंज पुलिस अपनी कानूनी और निजी महत्वाकांक्षा के वशीभूत होकर जुल्म करता  है और गरीब परिवार कहां तक इस अन्याय को सह जा पाता है | जबकि शास्त्रों और हमारे न्याय व्यवस्था में तो यह लिखा है "सत्यमेव जयते" परंतु देखना यह है कि गरीब का धैर्य टूटता है या फिर "सत्यमेव जयते" का कथानक।

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