आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आज़मगढ़: सगड़ी तहसील के श्री गांधी पी.जी.कॉलेज मालटारी आजमगढ़ राष्ट्रीय सेवा योजना बैनर तले अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया गया । इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के अधिकांश स्वयंसेवक/ सेविकाओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के प्रबंधक दिनेश राय,विशिष्ट अतिथि चीफ प्रॉक्टर डॉ.प्रेमचंद यादव व अध्यक्ष संस्था के प्राचार्य डॉ.कैलाश नाथ गुप्त रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ कुमारी सपना के सरस्वती वंदना एवं जाह्नवी यादव, पूजा के स्वागत गीत से हुआ। कार्यक्रम में आशुतोष चौरसिया "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा" राष्ट्रीय गीत प्रिया जायसवाल "ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी" साधना कनौजिया दहेज गीत, वर्तिका गुप्ता राष्ट्रगीत, महिमा यादव एन. एस.एस. डायरी से "करें राष्ट्र निर्माण बनाएं मिट्टी से अब सोना"आदि गीत प्रस्तुत किए।
स्वयंसेवक सनी देओल ने अपने भाषण में महिलाओं का समाज में सम्मान देकर उनके उत्थान की बात कही,जयदेव ने अपने भाषण में शेर- शायरी का प्रयोग किया वह महिलाओं को समाज में बराबर की हिस्सेदारी देने की बात कही। दिव्या,साधना, शिल्पा, शिप्रा, सपना प्रजापति,आरती आदि लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर महिला उत्थान की बात कहकर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम में सहभाग किया । संस्था के पूर्व छात्र नेता महावीर सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि - "लक्ष्मी की वरदान है बेटी धरती की धनवान है बेटी" आगे आपने निर्मला रमण व साइना नेहवाल के कार्यों की प्रशंसा की । संस्था के चीफ प्रॉक्टर डॉ.प्रेमचंद यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि- "धन की देवी लक्ष्मी ,शक्ति की देवी दुर्गा, ज्ञान की देवी सरस्वती महिला ही हैं अब महिला अबला नहीं बल्कि सबला हैं ,केवल उसे आवश्यकता है जागरूक होने की।" संस्था के प्राचार्य डॉ. के.एन.गुप्त ने अपने उद्बोधन में कहा कि-"महिला व पुरुष मिल कर दो नहीं बल्कि 11 होते हैं और आपसी सहयोग से दिन दूना रात चौगुना विकास करते हैं।" संस्था के प्रबंधक दिनेश राय ने अपने आशीर्वचन में कहा कि -"आप सभी लोग प्रतिभा संपन्न है केवल आवश्यकता इस बात की है कि अपनी प्रतिभा को पहचाने साथ ही अपनी कमियों को भी जाने और उसको बाहर निकालें । महाविद्यालय हो ,गांव हो, घर हो लड़कियां और महिलाओं का आदर करिए सम्मान करिए तो महिलाओं का विकास होगा सम्मान बढ़ेगा।"
राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डॉ. शैलेश पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि-" लड़कियों को टेंशन नहीं समझना चाहिए क्योंकि ये टेन सन के बराबर होती हैं, एक महिला माता के रूप में अपनी संतान को जब पढ़ाती है तो गुरु होती है, बीमार होने पर जब दवा करती है तो चिकित्सक होती है, गलती करने पर जब बच्चों को डांट या मारती है तो दरोगा कोतवाल होती है, अपनी संतान का कपड़ा व साफ- सफाई करती हो तो वह उसकी दाई होती है, किंतु माता का उद्देश्य बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास करना होता है। आगे आप ने कहा कि मां के रूप बहुत हैं जैसे बहन, मां ,बुआ ,दादी ,नानी, मौसी आदि अतः महिलाओं का सम्मान करना हमारी आपकी सबकी नैतिक जिम्मेदारी है।" डॉ. शैलेश पाठक ने संचालन किया और आए हुए अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।