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सगड़ी विधानसभा की सियासत में जनता ने किसे बनाया शहंशाह?


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आज़मगढ़: सगड़ी विधानसभा की सियासत पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में जनता ने किसको चुना है अपना नया विधायक। यह तो कल मतगणना के बाद ही पता चलेगा। लेकिन सगड़ी की राजनीति की अगर हम चर्चा करें तो पिछले महीनों में राजनीतिक दांव पेंच खूब चला है। शुरुआत कांग्रेस पार्टी से हुई जहां पर पहले कांग्रेस ने राणा खातून को टिकट दिया जिसके बाद पार्टी से बगावत करके पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता मुकेश राय ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता लेकर खुद विधानसभा सगड़ी से आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा।
मुकेश राय के चुनाव लड़ने के बाद अगर देखा जाए तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को हुआ है। सगड़ी विधानसभा में यह सभी जानते हैं कि कांग्रेस दूर-दूर तक लड़ाई में नहीं है, लेकिन यह लड़ाई तब दिलचस्प हो गई। जब आम आदमी पार्टी से कांग्रेस के ही सिपाही रहे। मुकेश राय ने ताल ठोक दी। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में किसके मतों की संख्या ज्यादे रहती है। 

वही भारतीय जनता पार्टी ने वर्तमान विधायक वंदना सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित किया। जिसके बाद अजमतगढ़ विकासखंड के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि मनीष मिश्रा के बारे में यह चर्चा जोरों पर चली कि वह बसपा से टिकट लेकर विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन मनीष मिश्रा ने सारी अटकलों पर विराम लगाते हुए यह घोषणा कर दी कि हम पार्टी के लिए गए निर्णय के साथ हैं और पार्टी में ही रहकर सेवा करेंगे। 
बसपा ने शंकर यादव को सगड़ी विधानसभा से प्रत्याशी घोषित किया। जिसके बाद पुराने कार्यकर्ता रहे धनई पटेल के समर्थकों में रोष उत्पन्न हो गया और दबी जुबान शंकर यादव का विरोध शुरू हो गया। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।
हम बात करें समाजवादी पार्टी की तो जैसे ही पार्टी ने डॉ एचएन पटेल को टिकट दिया। उसके बाद 2017 में प्रत्याशी रहे जय राम सिंह पटेल ने बगावत छेड़ दी, और निर्दल प्रत्याशी के रूप में उन्होंने पर्चा दाखिल कर दिया। इस बीच जगह जगह डॉक्टर एचएन पटेल का पुतला भी फूंका गया। हालांकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद जयराम पटेल ने तो पर्चा वापस ले लिया और पार्टी के साथ रहे। लेकिन समाजवादी पार्टी अपने उस सिपाही को नहीं संभाल पाई, जिसको पूर्व में सगड़ी की जनता ने विधायक बनाया था अभय नारायण पटेल। उन्होंने पार्टी से बगावत करते हुए भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। जिससे समाजवादी को एक बड़ा झटका लगा था। टिकट की दावेदारी को लेकर लगभग सभी पार्टियों में अंदरूनी विरोध रहा, जबकि बाहर से सभी अपनी अपनी पार्टी का झण्डा बुलंद करते रहे। 
कल 10 मार्च को प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होना है। आम जनता में जीत हार की चर्चा जोरों पर है चट्टी चौराहों पर यही चर्चा हो रही अगर देखा जाए तो सगड़ी विधानसभा में सपा भाजपा और बसपा तीनों की लड़ाई त्रिकोणीय हो सकती है। 
बसपा से शंकर यादव ने चुनाव लड़कर सबसे ज्यादा नुकसान समाजवादी को पहुंचाया है। क्योंकि दलित वोटरों के साथ शंकर यादव ने देवारा क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखी। इसके अलावा शंकर यादव को कुछ यादवों का भी वोट मिल सकता है। लेकिन अधिकांश यादव मतदाता समाजवादी पार्टी के साथ था।
हम बात करें भाजपा प्रत्याशी विधायक बंदना सिंह की तो सवर्ण मतदाताओं के अलावा अन्य जातीय मत भी इन्हें मिल सकते हैं। इसके अलावा इनके अपने व्यक्तिगत वोटर भी जिसके दम पर इनका परिवार सगड़ी में सियासत करता आया है। इसके साथ ही भाजपा की सरकार होने के नाते इसका लाभ मिलेगा। लेकिन वही क्षेत्र के कुछ इलाको की जनता विधायक बंदना सिंह से नाराज चल रही थी जिसकी वजह से नुकसान हो सकता है। हालांकि पूर्व समाजवादी विधायक अभय नारायण पटेल के भाजपा ज्वाइन करने के बाद पटेल समाज का कुछ वोट बंदना सिंह के पाले में जा सकता है। सब मिलाकर यह कहा जा सकता है की वंदना सिंह को हर बूथों पर कुछ न कुछ वोट मिला तो चुनाव जीतना तय है।
अगर हम समाजवादी पार्टी की बात करें तो समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी रहे डॉक्टर एचएन पटेल को पटेल समाज का जबरदस्त समर्थन मिला है। इसके अलावा यादव समाज भी साथ रहा, लेकिन शंकर यादव के चुनाव लड़ने से कुछ यादव वोटर समाजवादी से खिसके जरूर है। वही गांव सरकार के मुद्दे पर भारत परिषद का शंकर यादव को समर्थन मिला जिसका उन्हें लाभ मिल सकता है।देवारा क्षेत्र में भी शंकर यादव ने अपना दबदबा कायम रखा है। वही पूर्व विधायक अभय नारायण पटेल कुछ पटेल वोटो में भी सेंधमारी कर सकते हैं। लेकिन बावजूद इसके समाजवादी पार्टी से डॉक्टर एचएन पटेल मजबूती से चुनाव लड़ते हुए दिख रहे हैं। ऐसे में मुसलमानों का वोट बैंक भी समाजवादी को ही मिल सकता। तो डॉक्टर एचएन पटेल चुनाव को जीत सकते हैं।
फिलहाल सगड़ी की चुनावी गणित को समझ पाना इतना आसान नहीं है। लेकिन सगड़ी की सियासत में जातिगत समीकरण हमेशा हावी रहा है। ऐसे में अब यह जनता जनार्दन ही जाने कि किसे चुना है सगड़ी का नया विधायक। इन सारी अटकलों पर लगेगा विराम। जब कल होगी मतगणना तब तक के लिए करिए इंतजार।

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