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विकास की दौड़ में सड़क किनारे लगे वृक्ष हो रहे गायब

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर

सड़कों के किनारे बड़े वृक्ष हुआ करते थे।

जंगलों के संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।

आज़मगढ़: अप्रैल -मई- जून के महीने में सूर्य की तेज गर्मी से सभी बचना चाहते हैं ऐसे में बात आती है वृक्षों के संरक्षण की जो तेजी से काटे जा रहे हैं। यहाँ दोनों  बात होनी चाहिए tv, अखबारों में वृक्ष लगाओ के विज्ञापन खूब जोरों पर चल रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी मात्रा अत्यधिक कम है। लेकिन वही उसके उल्टे देखा जाए तो वृक्षों के काटने की होड़ आज भी मची हुई है। आपको बता दें कि सगड़ी तहसील क्षेत्र में बरसों पहले ही जगह-जगह छोटे-छोटे जंगल हुआ करते थे जिनका आज कहीं नामोनिशान नहीं दिख रहा है सड़कों के किनारे बड़े वृक्ष हुआ करते थे जिससे राहगीर कड़कती धूप में कुछ समय रुक विश्राम कर कर लेते थे लेकिन आज स्थिति ऐसी है कि मुख्य मार्गों पर वृक्षों के नाम ओ निशान नहीं दिख रहे हैं ऐसे में लोगों को मीलों दूर चल कर किसी वृक्ष का सहारा लेना पड़ता है इसलिए हम सभी को विज्ञापन की दुनिया से दूर हट कर वास्तव में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए और प्रशासन को छोटे-छोटे जंगलों के संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम उठाना चाहिए जिससे क्षेत्रों में पनप रहे छोटे बाग बगीचे आगे चलकर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में कारगर साबित हो सके।

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