आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
• एचआईवी क्या है इसे जानो, एड्स को पहचानो
आजमगढ़, 18 मई 2022 : एचआईवी/एड्स से निपटने का एकमात्र उपाय है - इसकी रोकथाम। उत्तर प्रदेश की 99 प्रतिशत जनसंख्या अभी एड्स से मुक्त है, बाकी एक फीसदी जनसंख्या में इसके नियंत्रण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य एचआईवी के नये मामलों में कमी लाना एवं एचआईवी/एड्स प्रभावित लोगों को आवश्यक उपचार एवं सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। अगर हम जागरूक रहेंगे तो इस बीमारी से बच सकते हैं। यह कहना है योजना के नोडल अधिकारी/जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ परवेज़ अख्तर का।
डॉ अख्तर ने बताया कि एचआईवी संक्रमण को रोकने का एकमात्र तरीका है - लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जाए। उक्त के क्रम में मंडलीय जिला चिकित्सालय के सहयोग से पाथ संस्था लोगों को इसके बारे में जांच के साथ जागरूक भी कर रही है। इस वायरस की उत्पत्ति व प्रसार के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा है। प्रयास है कि जन-जन तक एचआईवी/एड्स एवं इसके रोकथाम से संबंधित सभी सूचनाएँ एवं जानकारियाँ देकर लोगों को मुख्य धारा से जोड़ा जाये।
पाथ संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि संस्था जनपद आजमगढ़ में सन 2008 से लगातार काम कर रही है। जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के तहत लक्षित हस्तक्षेप परियोजना के अंतर्गत हाई रिस्क ग्रुप के लिए कार्य किया जा रहा है। संस्था में कुल 10 स्टाफ कार्यरत हैं, जिसमें प्रोजेक्ट मैनेजर, काउन्सलर, चार ओआरडबल्यू क्रमशः एफएसडबल्यू, एमएसएम, आईडीयूज तथा ट्रांसजेंडर के और चार पियर एजुकेटर क्रमशः एफएसडबल्यू, एमएसएम, आईडीयूज तथा ट्रांसजेंडर के हैं। इनके अलग-अलग हॉट स्पॉट एरिया हैं। जिसमें सन 2019-20 में 900 लोगों का पंजीकरण, 2020-21 में भी 900 लोगों का पंजीकरण तथा 2021-22 में 700 लोगों के पंजीकरण का लक्ष्य है। जहां प्रत्येक वर्ष लक्ष्य से ज्यादा लोगों का पंजीकरण कर जांच किया गया है। प्रभावित लोगों की निःशुल्क जांच कराकर उन्हें जागरूक किया जा रहा है।
उन्होने बताया कि पहले सरकार द्वारा दी गई किट से जांच की जाती है, फिर उस केस को कंफर्म करने के लिए मंडलीय जिला चिकित्सालय में एआरटी सेंटर तथा सुरक्षा क्लीनिक में एसटीआई काउन्सलर के पास भेजा जाता है। जहां उनका पंजीकरण कर खून की जांच कराई जाती है। तथा उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य भी किया जा रहा है। जिससे वह खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकें।
कालीनगंज निवासी 23 वर्षीय एफएसडबल्यू बबिता (काल्पनिक नाम) ने बताया कि एक वर्ष पहले मुझे समस्या हुई थी। इसके बाद मेरी मुलाक़ात क्षेत्र की पियर एजुकेटर से हुई थी। उन्होने मेरा अस्पताल में पंजीकरण कराने के बाद खून की जांच कराई थी। तथा अस्पताल से मुझे कंडोम के साथ मुफ्त दवा मिली थी। अब मुझे काफी आराम है। पियर एजुकेटर साल में दो बार हमारी निःशुल्क जांच कराती हैं।
तकिया निवासी 21 एमएसएम मुन्ना (काल्पनिक नाम) ने बताया कि दो वर्ष पहले मुझे समस्या हुई थी। इसके बाद मेरी मुलाक़ात क्षेत्र के पियर एजुकेटर से हुई थी। उन्होने मेरा अस्पताल में पंजीकरण कराने के बाद खून की जांच कराई थी। तथा अस्पताल से मुझे कंडोम के साथ मुफ्त दवा भी दिलाया था। अब मैं काफी ठीक हूँ।