आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गोरखपुर ब्यूरो
गोरखपुर: दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोरखपुर में 2017 के बाद छात्र संघ चुनाव नहीं हो सका। जिसके बाद लगातार छात्रों ने संघर्ष किया कि छात्रसंघ चुनाव हो जाए, लेकिन वह असफल रहे। इसी क्रम में छात्र नेता उज्जवल सिंह लगातार छात्रों के हितों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष डटे रहें।छात्र छात्राओं के हित के विषय में सोचते हुए उन्होंने कई बार प्रोफेसर सहित अन्य जिम्मेदारों को भी इस संदर्भ में ज्ञापन दिया। जिसका कोई नतीजा नहीं मिल रहा है। जिसके बाद छात्र नेता उज्जवल सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सालो से छात्रो के हितों का दोहन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ अन्याय किया जा रहा है। छात्रों की बात सुनने वाला कोई नहीं है। विश्वविद्यालय में फीस मनमानी ढंग से बढ़ा दी जाती हैं। यदि छात्रसंघ होता तो छात्र अपनी आवाज उठा सकते थे। लेकिन विश्वविद्यालय नहीं चाहता कि छात्र संघ का चुनाव हो क्योंकि अगर चुनाव हुआ तो कोई छात्र नेता चुना जायेगा और विश्वविद्यालय अपनी मनमानी नहीं कर सकेगा। सालों से विश्वविद्यालय तानाशाही रवैया अपनाते हुए छात्रों के हितों की आवाज को दबाता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के हितों की अनदेखी होते हुए देखता जा रहा हैं। इस कड़ी में उज्जवल सिंह ने छात्र छात्राओं को आश्वासन देते हुए कहा कि वह छात्रों के साथ सदैव खड़े रहेंगे और कहा कि जरा सोचो मेरे भाइयो जिस विश्वविद्यालय प्रशासन के ऊपर हम सालों से भरोसा कर उनकी बातों को मानते आ रहे हैं वह लगातार छात्रों के ऊपर हो रहे अत्याचार को देखते और सहते जा रहे हैं। लेकिन मैं उज्जवल सिंह विश्वविद्यालय के सभी भाइयों और बहनों से वादा करता हूं कि विश्वविद्यालय प्रशासन जो तानाशाही रवैया अपना रहा है, उसको हम हरकीज बर्दाश नही करंगे। छात्रसंघ बहाली के लिए हम लोग 5 साल से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन एक भी कर्मचारी या स्टाफ छात्रों से यह पूछने नहीं आया है कि आखिर हमारी समस्या क्या है। बिना छात्र नेता के आप सब जानते हैं कि हमें कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यदि कोई छात्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया होता, तो हम उसे आसानी से अपनी बातों को कह सकते है और अपनी सहूलियत के हिसाब से विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जो अनदेखी की जा रही है, अपने नेता के द्वारा प्रोफ़ेसर के सामने रख सकते है लेकिन ये लोग सुनने को तैयार नहीं है। इसलिए अब हमें बताना होगा कि छात्र शक्ति क्या होती है। हमें इन्हें बताना होगा जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है।