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जीयनपुर में चेहल्लुम के जुलूस में गूंजी या हुसैन की सदाएं।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आज़मगढ़: हजरत इमाम हुसैन और करबला के 72 शहीदों की याद में चेहल्लुम पर मातमी जुलूस 5 बजे से निकाला गया। जुलूस में अलम व दुलुदुल और 18 बनी हाशिम के ताबूत के साथ या हुसैन, या अली, या अब्बास, के सदाओं के साथ जुलूस गस्त करता रहा। 
जुलूस से पहले कुरैश नगर इमामबाड़े  के पास मजलिस आयोजित की गई। इसके बाद दुलुदुल व 18 बनी हाशिम के ताबूत का जुलूस निकाला गया। जुलूस कुरैश नगर से , समता नगर , होता हुआ जीयनपुर  चौक पर पहुंचा।
जहां मौलाना सैयद सफ़क़त तकी ने मजलिश को ख़िताब किया मौलाना ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीदे ए कर्बला में शहीद हो गए थे। उनकी शहादत से आज पूरी दुनिया में मुसलमानों की पहचान बनी हुई है।
जुलूस में मौलाना सैय्यद सफ़क़त तकी ने कहा कि अगर वो अपनी कुर्बानी न देते तो शायद ही कोई बचता। उस समय इस्लामी हुकूूमत का जो बादशाह था, उसका नाम यजीद था। इसके सारे काम इस्लाम के खिलाफ थे। इमाम हुसैन ने उसके इन कामों का विरोध किया व लाख समझाने पर भी वह बाज नहीं आया और आखिर में यजीद और इमाम हुसैन के बीच कर्बला में जंग हुई, जिसमें इमाम हुसैन के बीच कर्बला में जंग हुई, जिसमें इमाम हुसैन ने शहीद होकर इस्लाम जिंदा कर दिया। इस दौरान अंजुमन अब्बासिया खतीबपुर, अंजुमने महिबाने हुसैन समुद्रपुर, अंबेडकर नगर, घोसी से आए अंजुमनों ने  नौहा मातम किया।
वही जीयनपुर चौक पर अंजुमने असगरिया पारीपट्टी द्वारा पानी और फल का वितरण किया गया‌।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए जीयनपुर थाने की फोर्स जुलूस के दौरान मौजूद रही। जीयनपुर कोतवाल यादवेंद्र पांडेय खुद जुलूस में मौजूद रहे। और जुलुश को सकुशल सम्पन्न कराया। 

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