लेख।
लेखक: गौरव सिंह राठौर- होली का पर्व केवल रंगों और उल्लास का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन के कुछ महत्वपूर्ण और गहरे संदेशों की भी याद दिलाता है। यह पर्व हमें बताता है कि कैसे शक्ति, सत्य, और धर्म का सही पालन हमारे जीवन में संतुलन और शांति ला सकता है। पहला संदेश यह है कि शक्ति का सही उपयोग ही धर्म है! हिरण्यकश्यप को वरदान प्राप्त था कि उसे कोई अस्त्र, शस्त्र, मनुष्य, या पशु नहीं मार सकता था। यदि उसने अपनी शक्ति का उपयोग संसार के भले के लिए किया होता, तो परिणाम अलग होते, लेकिन उसने अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर स्वयं को भगवान बनाने की कोशिश की, जिससे अंततः उसका विनाश हुआ।
यह हमें यह सिखाता है कि जब शक्ति का दुरुपयोग होता है, तो उसका परिणाम विनाशकारी होता है। दूसरा संदेश है कि संबंधों से बड़ा सत्य होता है! प्रह्लाद ने अपने पिता की पूजा करने से इंकार कर दिया, क्योंकि उसने सत्य को परम पिता माना। यह हमें यह समझाता है कि सत्य के मार्ग पर चलना ज्यादा महत्वपूर्ण है, चाहे वह हमें अपने करीबी रिश्तों से ही क्यों न टकराना पड़े। धर्म का असली पालन सत्य के पक्ष में खड़ा होना है। तीसरी सीख यह है कि चालाकी अंत में हार जाती है! होलिका के पास वरदान था कि उसे आग नहीं जला सकती, लेकिन उसने प्रह्लाद को अपनी गोदी में लेकर जलती हुई आग में कूदने का प्रयास किया। परिणामस्वरूप, होलिका जलकर राख हो गई, जबकि प्रह्लाद बच गया। यह सिद्ध करता है कि छल और चालाकी के सामने सच्चाई और मासूमियत हमेशा जीतते हैं। आखिरकार, जिसने सब कुछ दिया, उसके ही विरुद्ध मत खड़े हो जाओ! हिरण्यकश्यप ने भगवान से वरदान प्राप्त किया था, लेकिन अहंकार के कारण उसने भगवान के खिलाफ खड़ा होकर उसका विरोध किया। यह हमें यह सिखाता है कि जिसने हमें जीवन और शक्ति दी है, उसके खिलाफ खड़े होने से हमें सिर्फ विनाश ही मिलेगा।इस होली पर हमें यह विचार करना चाहिए कि हम अपने भीतर के अंधकार को कैसे दूर कर सकते हैं और सच्चाई, शक्ति और धर्म के मार्ग पर चल सकते हैं। यह केवल रंगों का त्यौहार नहीं है, बल्कि एक अवसर है आत्म-चिंतन का, जहां हम सत्य के साथ खड़े होने का संकल्प लें।