कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रवीण राय अंबुज ने कहा कि बाबू विश्राम राय सादगी और त्याग के प्रतीक थे। उन्होंने अपने जीवन में विलासिता से दूरी बनाए रखी और स्वतंत्रता सेनानी पेंशन भी स्वीकार नहीं की। वे सेवा और सरल जीवन में विश्वास रखते थे।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि बाबू विश्राम राय समाजवादी आंदोलन के बड़े नेता थे। उन्होंने पूरी जिंदगी ईमानदारी और सादगी के साथ जनता की भलाई के लिए कार्य किया। बताया कि राज्यसभा सदस्यता प्रस्ताव मिलने पर भी उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। उनके त्याग और विचारों ने चंद्रशेखर सिंह के प्रधानमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त किया।
वक्ताओं ने कहा कि पहले राजनीति में संत, चरित्रवान और ईमानदार लोग अग्रिम पंक्ति में रहते थे और कार्यकर्ताओं को अवसर देते थे। आज की राजनीति में पूंजीवाद, माफिया और अपराधी तत्व हावी हो रहे हैं, जिनसे मुक्ति बेहद जरूरी है। इसे बाबू विश्राम राय के आदर्शों और सिद्धांतों पर चलकर ही संभव बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।