आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
सगड़ी (आजमगढ़)। हरसिंहपुर स्थित शक्तिपीठ मां श्री शीतला धाम में चल रही रामकथा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि जब मनुष्य के पुण्यों का उदय होता है, तब उसके जीवन में सुख और शांति का आगमन होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सुख और दुख दोनों साथ-साथ चलते हैं। जैसे जाड़े के बाद गर्मी आती है और गर्मी के बाद जाड़ा, उसी तरह जीवन में परिस्थितियां भी बदलती रहती हैं।
महाराज ने कहा कि जीवन में हर समय एक जैसा रहना कठिन है। मनुष्य सुख मिलने पर प्रसन्न हो जाता है और दुख आने पर दुखी हो जाता है, यही जीव का स्वभाव है। उन्होंने महाभारत के श्लोक “सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ” का उल्लेख करते हुए कहा कि जो व्यक्ति सुख-दुख, लाभ-हानि और जीत-हार को समान भाव से स्वीकार करता है, वही सच्चा ज्ञानी कहलाता है।
रामकथा के दौरान सीताराम विवाह के आगे के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों के कारण ही जीवन में दुख, कष्ट और बीमारियां पाता है। इसलिए विशेष रूप से विवाह के बाद व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति अधिक सावधान रहना चाहिए। सीखने की एक उम्र होती है, जीवन भर बार-बार गलती कर सीखना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के हाथ में केवल उसका कर्म है। कर्मों के आधार पर ही उसका प्रारब्ध बनता है और कोई भी व्यक्ति दूसरे के भाग्य को नहीं बदल सकता। हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। सनातन धर्म का आधार भी विश्वास और कर्म ही है।