सगड़ी (आजमगढ़)। हरसिंहपुर स्थित शक्तिपीठ मां शीतला धाम में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास प्रेमभूषण जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान कभी किसी का त्याग नहीं करते, बल्कि मनुष्य ही अपने कर्म, स्वभाव और मोह के कारण उनसे दूर हो जाता है।
महाराज श्री ने कहा कि संसार में रहने वाले प्रत्येक जीव के भीतर भाव, विवेक और संस्कार होते हैं। मनुष्य जब इन्हें भूलकर अहंकार और भटकाव में पड़ जाता है, तभी वह भगवान से दूर होता चला जाता है।
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य के अपने कर्म ही उसके जीवन में सुख और दुख की परिस्थितियां बनाते हैं। विशेष रूप से मनुष्य की जिह्वा इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। अधिक बोलना कई बार विवाद और झंझट का कारण बन जाता है। इससे बचने का सरल उपाय है कि व्यक्ति अपने मन और वाणी को भगवान के भजन में लगाए रखे।
महाराज श्री ने भगवान श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब भगवान श्रीराम ने महर्षि वाल्मीकि से निवास के लिए उचित स्थान पूछा, तो महर्षि ने कहा कि प्रभु ऐसा कौन सा स्थान है जहां आप नहीं हैं। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान सर्वत्र विद्यमान हैं और मनुष्य को हर स्थान पर उनकी उपस्थिति का अनुभव करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि जीवन में किसी कार्य के अधूरा रह जाने से निराश नहीं होना चाहिए। हर कार्य का एक निश्चित समय होता है। यदि किसी कारणवश वह समय पर पूरा न हो सके, तब भी मनुष्य को अपने प्रयास बंद नहीं करने चाहिए। हमारे सद्ग्रंथ यही सिखाते हैं कि मनुष्य का श्रम और कर्म ही उसके भविष्य का निर्माण करते हैं।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भजनों का आनंद लेते हुए भक्ति में झूमते नजर आए। रामकथा का वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।