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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालगंज में दुर्व्यवस्थाओं का अंबार।

आज़मगढ़।

कवरेज डेस्क। लालगंज आजमगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालगंज राज्यकिय स्वास्थ्य सेवा के नाम पर दिखावा मात्र रह  गया है, साठ शैय्या युक्त इस अस्पताल में दो या तीन चिकित्सक मात्र मौजूद रहते हैं,  चिकित्सकों का अभाव है ना सर्जन तैनात हैं, न तो दात व हड्डी के चिकित्सक है, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कहने मात्र को है, यहां तैनात चिकित्सक बाहर की दवा लिखते हैं। कुछ लाल पीली सफेद टैबलेट के अलावा शेष दवाओं का मिलना असंभव है जांच के नाम पर बाहर का रास्ता दिखाते हैं।  यल टी  कहते हैं क्या करें कोई केमिकल आदि जरूरी जांच की सामग्री नहीं है वर्षों से अल्ट्रा साउंड  एव  एक्सरे मशीन  बेकार पड़ी है कहते हैं टेक्नीशियन  एवं रेडियोलाजिस्ट नहीं है। यही हाल वर्षों से चल रहा है निरंतर मरीजों की संख्या घटती चली जा रही है ।वही प्राइवेट नर्सिंग होम पर मरीजों का तांता लगा है गरीब तबके के लोग अस्पताल में आते हैं उन्हें भी दवा गरीब तबके के लोग अस्पताल में आते हैं उन्हें भी दवा सुलभ नहीं है जबकि चर्चा है लाखों रुपए की दवाई केंद्र से बेच दी जाती है। सरकार प्रतिमाह   पचासो लाख रुपये जन्ता की गाढि कमाई का वेतन एवं व्यवस्था के नाम पर पानी में फेंक  दे रही है  सत्ता पक्ष या विपक्ष के कोई नेता सुधि नहीं ले रहा है धरती का भगवान कहां जाने वाला चिकित्सक सबसे संवेदनहीन हो गया है। मरीज गरीब है महँगी  दवा कहां से खाएगा इससे उनको मतलब नहीं है इनको तो अपनी शानदार बंगले  एवम कार  के लिए दवाओ  में दो सौ प्रतिशत  कमीशन खाना है मरीज मर जाय या  सड़ जाए यहां के चिकित्सकों की संवेदनहीनता जान लेवा साबित हो रही है नेता केवल लच्छेदार जसवीर जनता को खुश करके सत्ता पाने की फिराक में लगे हैं मरीज मर जाए चाहे जनता सड़ जाए सांप नाथ या नाग नाथ  कोई न कोई तो सत्ता पर काबिज होगा ही भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए आम जनता के पास वक्त नहीं है।

रिपोर्ट: अंजनी राय

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