मनोज चतुर्वेदी ब्यूरो प्रभारी सगड़ी आजमगढ़।
आज़मगढ़।
घर-घर पहुंच रहा मीठा जहर और कहीं आप भी तो नहीं हो रहे शिकार ।
सगड़ी।
सगड़ी तहसील क्षेत्र में फिल्टर पानी के जगह घर-घर में मीठा जहर पहुंच रहा है। और लोग इसके शिकार हो रहे हैं। यह धीमा जहर कैंपर में शुद्ध पानी के रूप में पहुंच रहा है। कैंपर में जो पानी होता है। वह पानी पीने लायक है। या नहीं यह बात किसी को नहीं पता। सगड़ी तहसील क्षेत्र में ही करीब 30 वाटर प्लांट चल रहे हैं। इनमें से एक ने भी रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है। इन संचालकों ने अपने यहां ट्यूबवेल लगा रखा है। और अधिकतर ट्यूबवेल का पानी कैंपरों में भरकर शुद्ध मिरर वाटर आरओ का पानी के नाम पर घरों और दुकानों में पहुंचा रहे हैं। यही हाल कमोबेश हर क्षेत्र के हर जनपद में है।

वाटर प्लांटों में लगाए गए ट्यूबवेलों के लिए जनस्वास्थ्य विभाग की तरफ से कनेक्शन भी नहीं है। ऐसे में ट्यूबवेल से सीधा पानी इन कैंपरों में भरा जा रहा है। इन कैंपरों में यह पानी कितना शुद्ध है। इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। हर प्लांट के अंदर एक पानी टेस्टिंग के लिए लैब होनी चाहिए। लेकिन, लैब तो दूर की बात इस पानी में क्लोरीन तक की मात्रा नहीं होती।
सगड़ी क्षेत्र के जीयनपुर, अजमतगढ़, लाटघाट,नरहन, रौनापार,अंजान शहीद,आखेंपुर, इमिलिया सहित कई गांव में चल रहे वाटर प्लांटों को लेकर प्रशासन के पास कोई जानकारी नहीं है। वैसे जनस्वास्थ्य विभाग के पास इसका रिकॉर्ड होना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की तरफ से भी कोई रजिस्ट्रेशन तक नहीं लिया गया है। ऐसे में शहर में जो प्लांट चल रहे है वह अवैध है। इस पानी की क्वालिटी के बारे में किसी को नहीं पता है।
सुविधा के नाम पर पी रहे जहर।
दुकानों व घरों में आरओ का नाम लिखकर पानी सप्लाई किया जा रहा है। अगर इन आरओ का पानी इतना ही शुद्ध होता तो इन संचालकों ने आज तक इसका रजिस्ट्रेशन तक क्यों नहीं करवाया है। अगर रजिस्ट्रेशन करवाते है तो पहले जनस्वास्थ्य विभाग से पानी शुद्ध है या नहीं इसका प्रमाण भी लेना होगा। प्रमाण तभी मिलेगा जब वे शुद्ध पानी सप्लाई करते होंगे। वहीं कुछ लोगों ने अपने स्तर पर पानी की जांच करवाई तो उसके अंदर क्लोरीन तक की मात्रा कम मिली है। वैसे ट्यूबवेल के अंदर क्लोरीन की मात्रा नहीं होती बल्कि बाद में जनस्वास्थ्य विभाग में पानी में डाल रहा है।
इधर फिल्टर संचालकों के कहना है कि- जल निगम में रजिस्ट्रेशन कराने जाते हैं तो वहां कहा जाता है कि हम सिर्फ सील्ड बेस वाटर को ही रजिस्टर्ड करते हैं, ऐसे में हमलोगों को दिक्कत होती है कि हम कहा रजिस्ट्रेशन कराये, हम सभी भी यही चाहते हैं कि नियमों के अनुरूप कार्य करें, पर हमारी मजबूरी कोई नहीं समझता।
वाटर प्लांट के लिए ये हैं नियम :
वाटर प्लांट लगाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है।
-प्लांट कहां लगा रहे है। इसके लिए नगरपरिषद के अधिकारियों से अनुमति लेनी जरूरी है।
-प्लांट के अंदर लैब होनी चाहिए। इस लैब में पानी की नियमित जांच होनी जरूरी है।
-वाटर प्लांट में पानी के शुद्धिकरण के सिस्टम की समय-समय पर जांच जरूरी है।
गर्मी शुरू होते ही रेट भी बढ़ाए ।कैंपरों से जो पानी मिल रहा है। वह शुद्ध भी नहीं है और लोगों को पैसे भी अधिक देने पड़े रहे है।
ये होने चाहिए मानक :
- पानी में टीडीएस 300 मिलीग्राम/लीटर से कम होना चाहिए।
-1 लाख लीटर पानी में 250 ग्राम क्लोरीन होना चाहिए।
-अगर पानी पड़ा है तो उसके अंदर 2 पीपीएम क्लोरीन होनी चाहिए।
पानी की जांच न होने पर भी उठे रहे सवाल।
हर दिन शहर में कैंपरों से पानी सप्लाई हो रहा है। ऐसा भी नहीं कि अधिकारियों के संज्ञान में नहीं है। अधिकतर कार्यालय में भी पानी के कैंपर जा रहे है। लेकिन इसकी जांच करने की जहमत कोई नहीं उठा रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग व स्वास्थ्य विभाग अलग अलग अपनी राय दे रहे है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपने सत्र पर पानी के सैंपल ले सकते है। लेकिन वो शिकायत का इंतजार कर रहे है। जब उनके पास शिकायत आएगी तो वो सैंपल ले लेंगे। वहीं जनस्वास्थ्य विभाग भी रजिस्ट्रेशन के लिए कोई पहल नही कर रहा है। इसका खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा।
इसलिए पानी जितना शुद्ध होगा शरीर के लिए फायदेमंद होगा। इसलिए पानी की जांच करवाने के बाद ही पानी लेना चाहिए।