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कोई भी भूखा ना सोए,मुंह तक निवाला सबको जाये।

मनोज चतुर्वेदी ब्यूरो प्रभारी सगड़ी आजमगढ़।

आज़मगढ़।

सामानों से भरा 32 पैकेट राशन को 32 परिवारों में बांटा गया।

आजमगढ़ 30 मार्च लॉकडाउन के दरमियान महिलाशक्ति मधुमिता बनर्जी,अर्चिता कांजीलाल और डॉक्टर बसंत जीवन बनर्जी ने भी मजबूर,मजदूर भूखों को रोटी देने का बीड़ा उठाते हुए हर एक पैकेट राशन में चावल,आटा,दाल,आलू,
तेल,नमक,चीनी,माचिस,मसाला,साबुन,बिस्कुट,नमकीन का पैकेट से भरा हुआ 32 पैकेट राशन एसडीएम सदर राघवेंद्र कुमार सिंह और सामाजिक/सांस्कृतिककर्मी अरविन्द चित्रांश के साथ हाफिजपुर चौराहा के आगे बंगाल से आए कबाड़ी बेचने वाले,और मुसहर बस्ती के महिला पुरुष बच्चों से भरा परिवारों को खाने के सामानों से भरा 32 पैकेट राशन बांटी गई।
अन्न के कारण मजबूर,मजदूर, गरीब के पेट के दर्द को शांत करना देश के हर नागरिक का कर्तव्य है,यह बात कहते हुए प्रमुख सामाजिक/सांस्कृतिककर्मी अरविन्द चित्रांश ने कहा कि सामाजिक विचारधारा की धनी महिलाशक्ति मधुमिता बनर्जी और आपकी भाभी अर्चिता कांजीलाल और डॉक्टर बसंत जीवन बनर्जी का पहल अद्वितीय है,अगर कहीं भी इस तरह से गरीब,मजदूर,ठेले और खोमचे वाले,मोची आदि दिहाड़ी वाले चिन्हित करके उन सभी को अपने अपने क्षमतानुसार भूखों को रोटी देना हम सभी का फर्ज है।
दोष किसका है इसे बाद में तय कर लेगें,पहले इस नाव को तूफां से बचाया जाए,...भीड़,महामारी,कोरोना वायरस को लेकर राजनीति से ऊपर उठकर देश के मजबूर,मजदूर,भूखों के लिए सोचे,स्थिति बहुत भयावह और खतरनाक है।
आपका अपना- अरविन्द चित्रांश
राष्ट्रीय कला सेवासंस्थान(NGO)आजमगढ़,उ.प्र.
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