आज़मगढ़
रिपोर्ट: मनोज चतुर्वेदी
सगड़ी। सामाजिक संगठन "राष्ट्रीय नाई महासभा" उत्तर प्रदेश के प्रधान संरक्षक राजमणि शर्मा, और आजमगढ़ जिलाध्यक्ष रविन्द्रनाथ शर्मा ने, सैलून संचालक [केश-कलाकार] नाई समाज के लोगों की आर्थिक मदद किए जाने की मांग सरकार से किया है। कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण से एहतियातन बंचाव हेतु देश में लगाए गए लाकडाउन के चलते नाइयों के सैलून बंद हैं। ऐसा होना नितांत आवश्यक भी है। मगर, रोज कमा कर प्रतिदिन के लिए दो जून की रोटी का इंतेज़ाम करने वाले उक्त सैलून संचालक नाई समाज के समक्ष अब भरण-पोषण का माध्यम बंद हो गया है।
संयुक्त रूप से जारी बयान में संगठन के नेताओं ने बताया कि, आजमगढ़ जिले में लगभग 7 हजार सैलून नाई-हज्जाम समाज के लोगों के हैं। इसमें सवा सौ के करीब तो आजमगढ़ शहर में ही हैं। इसके अलावा जिले में हर कस्बों, बाजारों में नाई जाति के लोग फुटपाथ पर बैठकर दाढ़ी-बाल बनाकर अपने परिवार के जीविकोपार्जन का इंतेज़ाम करते हैं।
लाकडाउन की वजह से एक माह से उनके कामकाज बंद हैं। ऐसे में समाज के लोग अत्यंत बदहाली, और भुखमरी जैसी स्थिति के दौर में हैं। गौरतलब है कि उक्त सैलून वालों में अधिकांश भूमि हीन, या नाममात्र की भूमि वाले ही हैं। इसलिए उनके पास खेती-बारी भी नहीं है, जो इस विषम परिस्थिति में कुछ सहारा बन सके।
यही हाल प्रदेश के अन्य जिलों में भी नाई जाति के अधिकांश लोगों का है। उल्लेखनीय है कि इस जाति के अधिकांश लोगों के भरण-पोषण का माध्यम दाढ़ी-बाल बनाने के बदले प्राप्त हुआ पारिश्रमिक ही होता है। क्योंकि सरकारी, नौकरी व अन्य व्यवसाय में इस जाति के लोग बहुत कम संख्या में हैं।
ऐसे में शासन-प्रशासन की विशेष रूप से नजरें-इनायत की दरकार नाई समाज को है। ताकि, इस महामारी जैसी त्रासदी के वक्त में उनके भरण-पोषण की समस्या का समाधान हो सके।