लेख।
वीर सिंह
आज हिंदी पत्रकारिता दिवस है, सभी साथियों को हार्दिक बधाई!
आज के दौर में मीडिया, इंटरनेट के जरिए जो वैश्वीकरण हो रहा है निश्चित रूप से पत्रकारिता को अमरत्व प्रदान कर रहा है। लेकिन आज कलम की पत्रकारिता ने दूसरा स्वरूप ले लिया है अब उस कलम की जगह टाइपराइटर और की-बोर्ड ने ले ली है, अखबारों की जगह कम्प्यूटर और मोबाइल स्क्रीन ने ले ली है।
आज भले ही सब कुछ आगे बढ़ रहा हो... लेकिन इस दौड़ में अगर कुछ पीछे छूट गया है तो वह है... दम तोड़ती कलम... जिसने कभी इसी पत्रकारिता को जन्म दिया था... लेखन को जन्म दिया था... मॉडर्न वैश्वीकरण के इस हाईटेक युग में वह कलम आज प्रौढ़ हो गई है और दम तोड़ रही है।
निष्पक्ष पत्रकारिता, प्रजातंत्र में जनता का विश्वास बढ़ाता है और पत्रकार को सम्मान देता है, लेकिन जब निष्पक्ष पत्रकारिता पर स्वार्थ हावी होने लगता है, तो देश के विकास में यही सबसे बड़ा बाधक बन जाता है।
कलम की धार ही पत्रकार की वास्तविक पहचान है। पत्रकारिता में साहस, धैर्य एवं संयम जैसे गुण ही संवदेनशील व जिम्मेदार बनाते हैं। भाषा, विचार, विषय एवं संवाद ही पत्रकारिता की परिभाषा, दशा और दिशा तय करते हैं।
मैं आज अपने पत्रकार साथियों से यह उम्मीद करता हूँ की वर्तमान में पत्रकारिता के इस दौर में अपनी कलम को पूरी तरह से स्वतंत्र रखेंगे, और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से देश को सही दिशा देंगे।