लेख: मनोज श्रीवास्तव
आजमगढ़। समूची मानव जाति अथवा जीव समुदाय को पोषण देने वाली प्रकृति मानव के भौतिक सुखों की वजह से खतरे में आ गई थी ।ऐसे में कोरोना की दस्तक ने लाँकडाउन के लिए विवश किया। डर से ही सही इस लाँकडाउन में मनुष्य ने अपनी गतिविधियां कम की ।मनुष्य के इस कम गतिविधियों का लाभ प्रकृति को काफी मुफीद साबित हुआ। जिसमें विशेषतया प्रदूषण को लेकर हुआ। वायु प्रदूषण,जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण आदि काफी मात्रा में कम हुए ।यही नहीं प्रकृति ने अपने अंदर बदलाव भी किया, काफी सुधार देखने को मिला ।पानी की शुद्धता, वायु की शुद्धता आदि प्रत्यक्ष देखने को मिली ।जो कहीं ना कहीं मानव जाति के लिए भविष्य में लाभप्रद साबित होगा।प्रकृति हमेशा पोषण देती है और उसी प्रकृति को धरती पर रहने वाले मानव सबसे ज्यादा खतरा उत्पन्न कर रहे है।
जहां कोरोना की वजह से मानव जाति परेशान हुई है। वही मानवीय गतिविधियां कम होने की वजह से पर्यावरण को लाभ पहुंचा है।धुआं उगलते कारखाने, मिट्टी व धूल से पटी पत्तियां, ऑक्सीजन की कमी होती रही है।उसकी वजह से आज भारत रेड की जगह ग्रीन कैटेगरी खड़ा हो गया है ।शुद्ध प्राणवायु हो चुकी है। प्रदूषण स्तर 300 से 00 एजी वाई हो गया है ।नदियों का पानी साफ हुआ है ।आबोहवा में शुद्धता आयी है। शोरगुल की जगह पक्षियों की चहचहाहट ने जगह ले ली है।कार्बन मोनोऑक्साइड के उत्सर्जन में काफी कमी हुई है। आबोहवा में जहर कम हुआ है।प्राणवायु में काफी सुधार हुआ है।
मानवीय गतिविधियां बंद होने की वजह से धरती ने भी सुधारात्मक रवैया अपनाया है ।लगातार सुधार करने में लगी हुई है। जो प्रत्यक्ष देखने को मिलता है ।
चार प्रमुख सुधार किया धरती ने।
1- कंपन -
30 से 50% तक कंपन कम हुआ मानवीय गतिविधियां कम होने की वजह से, कारण की ध्वनि प्रदूषण काफी कम हुआ है। जिसकी वजह से धरती कंपन में कमी आई।
2- ओजोन परत में सुधार।
निर्बाध गति से चल रहे फैक्ट्रियां जो धूआँ के माध्यम से जहर उगलती थी। जो केमिकल ओजोन परत के लिए नुकसान में सहायक होती थी आज उनमें काफी कमी हुई है ।उनका उत्सर्जन काफी कम हुआ है ।जिससे ओजोन परत के क्षेत्र में सुधार हुआ है। ओजोन परत लगभग 8 किलोमीटर मोटी है। जो पराबैंगनी किरणों को रोकने में सहायक होती है।
3- प्रदूषण का स्तर।
हवा में प्रदूषण का स्तर काफी कम हुआ है ।खतरनाक नाइट्रोजन ऑक्साइड का स्तर हवा में 40 से 50% तक कम हुआ है। हवा में तमाम वाहनों, फैक्ट्रियों के वजह से काफी बदलाव आ गया।इसमें जहर की भाँति धुआं का मिश्रण कम हुआ है। जिसमें सुधार प्रत्यक्ष देखने को मिलता है।
4- साफ होती नदियां ।
नदियाँ मानव गतिविधियां कम होने से काफी साफ हुई है। जिसमें ताल वगैरह भी शामिल है। ।इसमें घुलित आक्सीजन 6से 7प्रति लीटर मिलीग्राम से बढ़कर 9 से 10 तक पहुंच गया है।