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न्यायिक कार्य के सम्पादन में कारागार प्राधिकारीगण एवं अभियोजन से आवश्यक समन्वय स्थापित करें।

आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

आजमगढ़ 31 जुलाई-- जनपद एवं सत्र न्यायाधीश आजमगढ़ प्रमोद कुमार शर्मा ने बताया है कि न्यायिक अधिवक्तागण द्वारा (जहाॅ कहीं भी सम्भव हो) संचालित न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारी द्वारा लम्बित/नवीन जमानत, लम्बित/नवीन अग्रिम जमानत, आवश्यक प्रकृति के प्रकीर्ण फौजदारी प्रार्थना पत्र का निस्तारण, आवश्यक प्रकृति के दीवानी प्रार्थना पत्र का निस्तारण यथा निषेधाज्ञा प्रार्थना पत्र, विचाराधीन बन्दियों से संबंधित न्यायिक कार्य/रिमाण्ड तथा अन्य प्रकृति के ऐसे मामले जो जनपद न्यायाधीश के मतानुसार ऐसी सुनवाई हेतु उचित हो, पर ही विचार किया जायेगा। जमानत/अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र, अन्य आवश्यक प्रकृति के प्रार्थना पत्र प्राप्त करने हेतु एक ईमेल आईडी dcazafiling@gmail.com पूर्व में ही सूजित की जा चुकी है। जिसे जनपद न्यायालय, आजमगढ़ की अधिकृत वेबसाईट पर भी नोडल आफिसर कम्प्यूटर/सिस्टम आफिसर द्वारा अपलोड किया जा चुका है। 
उन्होने कहा कि विद्वान अधिवक्तागण द्वारा ई-मेल से प्रेषित किये गये प्रार्थना-पत्र में अधिवक्ता/वादकारी का विवरण मय मोबाईल व ई-मेल आईडी का अंकन होना आवश्यक है। ई-मेल से प्राप्त प्रार्थना-पत्रों को जनपद न्यायालय के कम्प्यूटर अनुभाग द्वारा डाउनलोड किया जायेगा तथा उनकी सूची तैयार की जायेगी। उन प्रार्थना-पत्रों को कम्प्यूटर अनुभाग यथासम्भव सर्वप्रथम अवसर पर सीआईएस में पंजीकृत किया जायेगा। यदि उसमें कोई त्रुटि हो तो उसी दिन सम्बन्धित विद्वान अधिवक्ता को कम्प्यूटर अनुभाग में कार्यरत कर्मचारीगण द्वारा अधिवक्ता/वादकारी के प्रार्थना-पत्र में अंकित मोबाईल/ई-मेल आईडी पर सूचित किया जायेगा। ऐसे प्रकरण, जो त्रुटिमुक्त हों, को काजलिस्ट (सीआईएस द्वारा उत्पन्न) में 48 घण्टों बाद या विधि द्वारा निर्धारित अवधि में सूचीबद्ध किया जायेगा। केवल उपरोक्त आवश्यक प्रकृति के प्रार्थना-पत्र ही सीआईएस काजलिस्ट में सूचीबद्ध किये जायेंगे, शेष वादों में सामान्य तिथियाँ नियत की जायेंगी। 
जनपद एवं सत्र न्यायाधीश ने बताया कि विद्वान अधिवक्तागण/वादकारियों को सहायता प्रदान किये जाने हेतु पूर्व में समर्पित हेल्पलाईन नम्बर 9453757387, 9451702255 एवं 9044857414 घोषित किये जा चुके हैं। उन्होने कहा कि उक्त हेल्पलाईन नम्बर को जनपद न्यायालय आजमगढ़ की वेबसाईट पर प्रदर्शित किया जाय, जिससे सूचीबद्ध वादों की प्रकिया एवं समय सारणी से सम्बन्धित सूचना प्राप्त करने हेतु उपयोग किया जायेगा। अधिवक्तागण/वादकारीगण को सूचीबद्ध वादों/स्थिति की सूचना ई-कोर्ट ऐप के माध्यम से प्राप्त किये जाने हेतु अवगत कराया जायेगा, जिससे उपरोक्त सुविधा के सम्बन्ध में जागरूकता बढ़ सके। 
उपरोक्त न्यायालयों के पीठासीन अधिकारीगण द्वारा प्रार्थना-पत्रों का निस्तारण व आदेश पारित/अपलोड की कार्यवाही अपने अधीनस्थ कर्मचारीगण के सहयोग से अपने आवासीय कार्यालयों से करायी जायेगी। बन्ध पत्र की स्वीकृति व रिहाई आदेश की कार्यवाही पूर्व पारित प्रशासनिक आदेश द्वारा रिमाण्ड कार्य हेतु नामित न्यायिक अधिकारीगण द्वारा सम्पादित की जायेगी। उपरोक्त न्यायालयों के पीठासीन अधिकारीगण को निर्देशित किया जाता है कि वे न्यायिक कार्य के सम्पादन में कारागार प्राधिकारीगण एवं अभियोजन से आवश्यक समन्वय स्थापित करें। 
उन्होने कहा कि विचाराधीन बन्दियों से संबंधित न्यायिक कार्य/रिमाण्ड, बन्ध पत्रों का सत्यापन, रिहाई आदेश हेतु एक या दो न्यायिक अधिकारियों की सेवायें लिया जाना है। स्थिति यह है कि प्राप्त सूचनानुसार उपरोक्त कार्य हेतु नियुक्त न्यायिक अधिकारीगण का आवास वर्तमान में कन्टेनमेन्ट जोन में नहीं है। भविष्य में यदि किसी न्यायिक अधिकारी का आवास कन्टेनमेन्ट जोन में आने की दशा में उससे न्यायिक कार्य नहीं कराया जायेगा। केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा कोविड-19 के सम्बन्ध में दिये गये मार्ग-दर्शनों/दिशा-निर्देशों का अनुपालन उपरोक्त समस्त पीठासीन अधिकारीगण द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा। विद्वान अधिवक्ताओं/वादकारियों का न्यायालय परिसर में प्रवेश पूर्णतः निषिद्ध रहेगा। उपरोक्त न्यायिक अधिकारीगण को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायालय की कार्यवाही सम्पादित करने में यदि कोई कठिनाई आती है तो उसके निराकरण हेतु सीपीसी, माननीय उच्च न्यायालय का सहयोग लिया जा सकता है। 
उन्होने सदर मुंसरिम को निर्देशित किया है कि वह समस्त न्यायालयों से अपेक्षित विवरण संकलित करके प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। 

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