आज़मगढ़।
सरायमीर।
सरायमीर।. स्थानीय थाना क्षेत्र मे शहीदाने करबला की याद मे चौक स्थित इमामबाड़ा अज़ाखाना अबु तालिब से निकलने वाला ताज़िया का जुलूस इस साल कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार की तरफ़ से इजाज़त न मिलने की वजह से नही निकाला गया जिससे इमामबाड़ो मे सन्नाटा व ताज़ियादारों मे मायूसी छाई रही इमाम हुसैन की दर्दनाक शहादत और ताज़िया रखने की इजाज़त न मिलने की वजह से भूखे प्यासे व गम का प्रतीक काले लेबास पहने हुए ताज़ियादार आमाले आशूरा करने के बाद कर्मवार इमामबाड़ो मे पहूंच कर अलवेदाई नौहा व मातम करते रहे ।अज़ाखाना अबूतालिब मे कोवीड 19 की गाईडलाइन का पालन करते हुए सीमित लोगों के साथ मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मासूम असगर साहब ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ:स) ने चौदह सो साल पहले करबला के मैदान मे जो पैगाम दिया था व आज हमारे मुल्क के लोगों को उसके ओसूल को समझने और सीखने की ज़रूरत है इमाम हुसैन इन्सानियत के सबसे कीमती सरमाया का नाम है तारीखे इन्सानियत मे जितनी भी अज़ीम हस्ती गुज़री हैंऔर दुनिया के तमाम मज़ाहिब के जो आईडियल हैं अगर उनको इकठ्ठा किया जाये तो तो इमाम हुसैन के अन्दर व तमाम खूबीयां पाई जाती हैं । मौलाना ने10 मोहर्रम को करबला के मैदान मे इमाम हुसैन सहित 72 लोगों की शहादत के बाद यज़ीदी फौज ने जरिया इमाम हुसैन के खैमों मे आग लगाये जाने महिलाओं व बच्चों को बंधक बनाये जाने और इमाम हुसैन की 4साल की बेटी जनाब सकीना के कानों से बुन्दे छीन्ने व तमाचा मारे जाने का मन्ज़र बयान किया तो मजलिस को सुन रहे महिलाएँ बच्चे व पुरुष फ़फ़क कर रोने लगे ।शिया कमेटी सरायमीर के मीडिया इंचार्ज मोहम्मद हुसैन ने ताज़िया के बारे मे बताया कि हज़रत मोहम्मद साहब (स:व) के पूरे परिवार को बिना किसी जुर्म के अत्याचारी शाषक यज़ीद ने मोहर्रम की 10 तारीख को भूखा प्यासा रखकर कत्ल करवा दिया था और उनके बचे हुए परिवार वालों को उन शहीदों के शव भी दफ़न नही होने दिये गये थे यही कारण है कि देश भर मे 1 मोहर्रम से इमाम हुसैन व उनके साथियों की याद मे उसी शव का प्रतीक ताज़िए के रूप मे रखा जाता हैऔर 10 मोहर्रम को सुबह से ही लोग भूखे प्यासे रहते हैं और फिर अपने अपने घर से ताज़ियों को एक शव यात्रा के रूप मे करबला ले जाते हैं जहाँ पर ताज़िए दफ़न कर दिये जाते हैं उसके पश्चात ही लोग भोजन करते हैं और पानी पीते हैं भारत मे अज़ादारी व ताज़ियादारी की 700 साल की तारीख मे पहली बार ऐसा हो रहा है जब कोरोना संक्रमण को देखते हुए ताज़िया जुलूस पर पाबन्दी लगी हुई है समिति की ओर से लाकडाउन का पालन किया जाएगा।
रिपोर्ट: मोहम्मद यासिर सरायमीर