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सादगी के साथ दी गई कारगिल शहीद रामसमुझ यादव को श्रद्धांजलि।


आज़मगढ़।

रिपोर्ट: वीर सिंह

सगड़ी। सगड़ी तहसील क्षेत्र के नत्थूपुर अंजान शहीद स्थित शहीद पार्क में रविवार को कारगिल शहीद रामसमुझ यादव के शहादत दिवस पर 30 अगस्त को सादगी के साथ श्रद्धांजलि दी गई । साथ ही शहीद रामसमुझ यादव को नमन किया गया ।

कोविड -19 के चलते सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सादगी के साथ करगिल शहीद रामसमुझ यादव के मूर्ति के पास  दीप प्रज्वलित करते हुए  सर्वप्रथम शहीद रामसमुझ यादव  के परिवार के  पिता राजनाथ यादव , छोटे भाई  प्रमोद यादव , भतीजा अभय यादव, अभिनव यादव, भतीजी कशिश, आराध्या, पंकज यादव, मामा रामवृक्ष यादव, तीरथ यादव, रामप्रसाद यादव, निरंजन यादव, नीरज यादव, राकेश यादव, बालचंद कुशवाहा, ठाकरे फिल्म के गीतकार लेखक मनोज यादव, चन्द्रभान यादव, हरिश्चंद्र यादव, पुजारी  आदि लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी ।साथ ही शहीद रामसमुझ यादव को नमन किया ।


श्रद्धांजलि देने आए लोगों का नापा गया तापमान, दिया गया मास्क।  
 सगडी। कोविड -19 को देखते हुए कोरोना वायरस से बचाव के लिए  सगड़ी तहसील क्षेत्र के नत्थूपुर स्थित  शहीद पार्क में कारगिल शहीद रामसमुझ यादव को श्रद्धांजलि देने आये लोगो का सर्वप्रथम  तापमान मापा गया , उनके हाथ को सेनेटाइज किया साथ ही  मास्क वितरित किया गया।जिसके लिए गेट के पास  वालंटियर लगाये गये थे । 
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अदम्य साहस के साथ लडते हुए दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे कारगिल शहीद रामसमुझ यादव। 

सगड़ी । सगड़ी तहसील क्षेत्र के नत्थूपुर गांव निवासी कारगिल शहीद रामसमुझ यादव का जन्म 30 अगस्त 1977 को सगड़ी तहसील क्षेत्र के नत्थूपुर  गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम राजनाथ यादव और माता का नाम प्रतापी देवी है।
उन्होंने हाई स्कूल और इंटर मीडिएट की शिक्षा मौलाना आजाद इंटर कॉलेज अन्जान शहीद और स्नातक की शिक्षा श्री गांधी पी जी कालेज मालटारी से ग्रहण किया था।
आर्थिक रुप से पिछड़े राजनाथ यादव के परिवार में जन्म लेने वाले सबसे बड़े बेटे थे। छोटे भाई प्रमोद वह छोटी बहन मीना दोनों भाई बहनों की जिम्मेदारी थी इसके बावजूद कारगिल शहीद रामसमुझ यादव स्वयं मेहनत मजदूरी कर अपनी पढ़ाई पूरी की और देश सेवा के जज्बे में आर्मी ज्वाइन किया।
सन् 1997 में वाराणसी आर्मी में भर्ती हुए। इनकी जॉइनिंग 13 कुमाऊं रेजीमेंट में हुई तथा पहली पोस्टिंग सियाचिन ग्लेशियर में की गई। 3 महीने बाद सियाचिन ग्लेशियर से नीचे आने के पश्चात 1999 में कारगिल जंग शुरु हो गई जहां  इनकी पल्टन को कारगिल  युद्ध में भेज दिया गया। यहां उन्होंने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों से कड़ा मुकाबला किया और जंग में लड़ते हुए 30 अगस्त 1999 को शहीद हो गए।
इसे दुर्भाग्य कहें या सौभाग्य जिस तारीख को जन्म हुआ उसी तारीख 30 अगस्त को मात्र 22 वर्ष की उम्र में शहीद हुए।
उनकी याद में नत्थूपुर स्थित शहीद पार्क में 30 अगस्त को शहादत दिवस मनाया जाता है,और शहीद मेला लगता है।लेकिन कोविड -19 के चलते शहीद मेला नहीं लगा।


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