आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
लेख।
साहित्य आजमगढ़ की अगर शान और देश में ही नही विश्व में पहिचान रखता है तो यह आज भी बखूबी डॉ0 अखिलेश चन्द्र और डॉ0 गीता सिंह के द्वारा जारी है।अल्लामा शिब्ली नोमानी,अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध,आचार्य चन्द्र बली पाण्डेय, पंडित लक्ष्मी नारायण मिश्र की इस साहित्यिक बगिया को आज डॉ0 अखिलेश चन्द्र और डॉ0 गीता सिंह सिंचित करने में लगे हुए हैं।जिनके सम्पादन में निकलने वाली 'अखिल गीत शोध दृष्टि 'अंतरराष्ट्रीय शोध अर्द्ध वार्षिक पत्रिका का अंक 13-14 संयुक्तांक दसवें वर्ष में प्रकाशन में पहुँचते हुए अपने मुकाम को हासिल कर रहा है।
इस पत्रिका का नया अंक 49 विद्वानों के लेखों से सुसज्जित है और 252 पृष्ठों में प्रकाशित हुआ है।
इस हर्ष के अवसर पर सम्पादक डॉ0 गीता सिंह ने कहा- 'आजमगढ़ की साहित्यिक विरासत को आगे बढाने में मैं अपने पति और पत्रिका के प्रधान सम्पादक डॉ0 अखिलेश चन्द्र के साथ पिछले 10 वर्ष से लगी हुई हूँ।यह पत्रिका भारत के 23 राज्य और विश्व के चार देशों -कनाडा,नेपाल,जापान,और मॉरीशस तक अपने लेखकीय प्रसार के साथ जुड़ी हुई है।जब भी इसका नया अंक आता है मैं खुशी से फूले नही समाती हूँ।
मेरे पिता स्व0 डॉ0 मुरलीधर सिंह अंश जी ने जब मुझे साहित्य विधा में पी-एच्.डी. की शिक्षा दिलाई थी तभी कहा था बेटा एक दिन भारत का नाम साहित्य में विश्व स्तर तक पहुंचाना,मैंने उनसे वादा किया था जो अब साकार हो रहा है वो जहां भी होंगे इससे खुश हो रहें होंगे।'
प्रधान सम्पादक डॉ0 अखिलेश चन्द्र जो एक कहानीकार,कवि,समीक्षक,नाटककार ,राजनीतिकार भी हैं ने बताया कि 'यह प्रकाशन हम दोनों के लिए एक मिशन है जिसे पूरा करने में हम कोई कसर नही छोड़ते।जैसे ही नया अंक आ जाता है हम अगले नये अंक के मिशन पर लग जाते है।इस पत्रिका के प्रकाशन के लिये हमने निधि शैक्षिक एवं शोध संस्थान आजमगढ़ का गठन किया ।इस संस्थान ने अब तक 20 अंक की पत्रिका का प्रकाशन किया है।आजमगढ़ का मान सम्मान विश्व स्तर तक पहुँचता रहें यही हम दोनों का साझा प्रयास है।
इस पत्रिका का अंक 02 अपने आप में एक कीर्तिमान स्थापित कर चुका है ।इस अंक में 160 विद्वानों के लेख 602 पृष्ठों में प्रकाशित थे।यह अंक 2011 में प्रकाशित हुआ था।
ध्यातव्य है कि जनपद आजमगढ़ के डी ए वी पी जी कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर एवं अध्यक्ष स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के पद की शोभा बढ़ा रही डॉ0 गीता सिंह की साहित्यिक सेवा के कारण माननीय मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ योगी जी भी इन्हें 2017 में 'शिक्षक श्री'सम्मान से भी सम्मानित कर चुके हैं।इनकी अब तक कुल 17 पुस्तकें भी प्रकाशित है।
जनपद के श्री गाँधी पी जी कॉलेज, मालटारी में एसोसिएट प्रोफेसर शिक्षा संकाय में कार्यरत डॉ0 अखिलेश चन्द्र भी साहित्यिक धरातल पर अपने पैर बड़ी मजबूती से आगे बढ़ा रहें हैं।उनकी कहानी संग्रह 'अनकही'की कहानी 'हँसुली'का अब तक 06 राष्ट्रीय नाट्य मंचन हो चुका है।उनके साहित्य पर हिन्दी के कई समीक्षकों ने अपनी लेखनी चलाई और बहुत सी पत्र पत्रिकाओं में उनके बारे में लेख छपते रहते हैं।इनकी भी कुल 06 पुस्तकें प्रकाशित हैं।