आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आज़मगढ़। मौजूदा प्रदेश सरकार नें मुहर्रम मे सख्ती बरताकर यह साबित कर दिया की उनके लिए मुसलमानों की आस्था के लिए कोई जगह नहीं है ।लगातार शासन और प्रशासन से रियाएत की मांग किया गया की हम जुलूस और भीड़ भाड़ बिल्कुल नहीं करेंगे हम बहुत जागरूक हैं बस हमें ताजिया रखने और उसको दफन करने की इजाजत दे दिया जाए संख्या जो शासन प्रशासन निर्धारित करेगा हम उसका शत प्रतिशत पालन करेंगे परंतु सरकार ने बिस्कुल नर्मी नहीं दिया बल्कि आम दिनों से ज्यादा सख्ती का पालन करने का आदेश जारी कर दिया ।
नेहाल मेहदी ने कहा की इससे पहले भी पूर्व में अनेकों महामारियां आई थी और देश बहुत बुरी बुरी परिस्थिति से गुजरा है लेकिन मोहर्रम की ताज़िया दारी पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था इतिहास में पहली बार मोहर्रम पर इतना कड़ा प्रतिबंध लगाकर सरकार ने करोड़ों मुसलमान एवं हर वह व्यक्ति जो ताजियादारी करता है उसके दिल को गंभीर कष्ट दिया है । इस संबंध में हम लोगों ने एक याचिका माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में दायर किया था लेकिन न्यायालय ने भी संवैधानिक आधार पर फैसला ना सुनाकर सरकार का पक्ष लेते हुए हमारी याचिका ख़ारिज कर दिया और उस न्यायालय के फैसले का हमने सम्मान करते हुए ताजिया चौक पर नहीं रखा और दफन नहीं किया । हमारा समुदाय 2020 का मुहर्रम आजीवन याद रखेगा और सरकार के मनमाने रवैय्ये को भी याद रखेगा ।