आज़मगढ़।
रिपोर्ट: विशाल कुमार
बूढ़नपुर। आज़मगढ़ मण्डल के प्रतिष्ठित गांधी शताब्दी स्मारक पी जी कालेज कोयलसा के पूर्व प्राचार्य डॉ. मदन मोहन श्रीवास्तव का लम्बी बीमारी के बाद उनका निधन हो जाने से क्षेत्र व ज़िले में शोक की लहर दौड़ गई। इस खबर की सूचना जैसे ही लोगों को मिली जो जहां था वहीं से इनके संतप्त परिवार को सांत्वना देने इनके घर पहुंच गया।
मृदुभाषी सरल व सौम्य व्यक्तित्व के धनी विद्वान डॉ श्रीवास्तव पी जी कालेज कोयलसा में विभागाध्यक्ष भूगोल रहकर क्षेत्र मे जो शिक्षा का प्रकाश फैलाया है उसके लिए कोयलसा क्षेत्र उन्हें भूल नहीं पा रहा है । उनके घर पहुंच कर संतप्त परिवार को सांत्वना देने व श्रद्धांजलि देने का शिलसिला जारी है । शिक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़े बड़े लोग डॉ श्रीवास्तव जी को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके विद्वता का बखान कर रहे हैं। आप को बता दें कि अपने भरे पूरे परिवार के बीच पिछले 6 महीने से गंभीर बीमारी के कारण कलकत्ता के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान डॉ श्रीवास्तव जी सात सितम्बर को सायं 6 बजे के करीब अपनी अंतिम सांस ली।
डॉ श्रीवास्तव के पार्थिव शरीर को शाम के वक्त इनके बड़े पुत्र मनीष मोहन श्रीवास्तव ने अम्बेडकर के कमहरिया घाट पर शरयू नदी के पावन तट पर मुखाग्नि दी।
इनके पास 3 पुत्र है बड़े पुत्र मनीष श्रीवास्तव अध्यापक है। दूसरे पुत्र मलय मोहन श्रीवास्तव चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। तीसरे पुत्र मधुप मोहन श्रीवास्तव रेलवे डी आर एम पद पर कार्यरत है। गाजीपुर जिले के सैदपुर तहसील अन्तर्गत सौना गांव के मूल निवासी श्री श्रीवास्तव बूढ़नपुर बाजार में अपने निजी आवास में रहते थे। सत्तर वर्षीय श्री श्रीवास्तव पी जी कालेज कोयलसा में १९७३ से२०१३ तक तैनात रहे । २०११ से २०१३ तक प्राचार्य के पद को सुशोभित किया । छः भाइयों में पांचवें स्थान पर रहने वाले श्री श्रीवास्तव शुरू से ही काफी मेधावी थे।
डा नरेन्द्र नाथ यादव डा अशोक सिंह डॉ श्यामबृक्ष मौर्य डॉ हरिसेवक पाण्डेय डॉ ज्ञान स्वरुप लाल श्रीवास्तव डॉ श्रीराम पाण्डेय डाक्टर निरंकार सिंह आदि लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा है कि डॉ श्रीवास्तव की अनुपस्थिति हमेशा-हमेशा के लिए खलेगी।

