आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आजमगढ़ 07 अक्टूबर-- जिला कृषि रक्षा अधिकारी डाॅ0 उमेश कुमार गुप्ता ने किसान भाईयों को अवगत कराया है कि वर्तमान समय में धान की फसल में मुख्यतः गन्धी बग, भुरा फुदका एवं सैनिक कीट के प्रकोप की सम्भावना के दृष्टिगत फसल के निगरानी के साथ-साथ प्रकोप की दशा में ससमय नियन्त्रण आवश्यक है। अतः इन कीटों से बचाव हेतु सुझाव एवं संस्तुतियों को अपना कर फसल को बचाया जा सकता है।
उन्होने बताया कि गन्धी बग कीट के वयस्क एवं तरुण पीले रंग के दोनों दूधिया अवस्था में दानों का रस चूसते है और दानों का फीका सा सफेद दाग छोड़ देते है। जिससे दानें खाली रह जाते है। इस कीट के प्रकोप की दशा में एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 ली0 मात्रा प्रति हे0 की दर से 500 से 600 ली0 पानी में घोलकर छिड़कांव करें अथवा मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल अथवा फेनवेलरेट 0.04 प्रतिशत धूल की 20 से 25 किग्रा0 मात्रा का प्रति हे0 की दर से बुरकाव करें।
भूरा फुदका कीट के शिशु तथा प्रौढ़ कत्थई रंग के पंख वाले अथवा बिना पंख के होते है, दोनों ही पौधैं के कल्लों के बीच रहकर तने के निचले भाग तथा पत्ती के आवरण (पर्ण कंचुकी) से रस चुसते रहते है। इसके रस से पत्तीयों पर काला कंचुल उग जाता है जो प्रकाश संश्लेषण में बाधक होता है। वानस्पतिक अवस्था में इसके प्रकोप के फलस्वरुप गोलाई में पौधे छोटे रह जाते है तथा सुख जाते है। इसे ‘‘हाॅपर वर्न‘‘ कहते है, बाद में प्रकोप होने पर पौधे गिर जाते है तथा धान में चावल नही बनते। यह कीट ‘‘ग्रासी स्टन्ट’’ वायरस का वाहक भी होता है। इस कीट के प्रकोप की दशा में एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 ली0 अथवा 10 कीट प्रति हिल होने पर कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी, 18.5 किग्रा0 मात्रा का प्रयोग प्रति हे0 3-5 सेमी0 पानी भरे खेत में करें अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल की 125 मिली0 मात्रा प्रति हे0 की दर से 500 से 600 ली0 पानी में घोलकर छिड़काव करें।
सैनिक कीट की संूडिया हानिकारक होती है, ये कीट प्रारम्भ में पत्तीयों को खाती है तथा बाद मे कई धान की बालियों को टुकड़े में काट कर जमीन पर गिरा देती है। इसके प्रकोप की दशा में फेनवेलरेट 0.04 प्रतिशत धूल अथवा मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल 20 से 25 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से सायंकाल बुरकाव करें।
