मऊ।
रिपोर्ट: ब्यूरो
मऊ- अनादिकाल का साक्षात प्रमाण है सीता कुण्ड घोसी मऊ स्थानीय नगर स्थित सीताकुण्ड एक पौराणिक धरोहर एव अनादिकाल का साक्षात प्रमाण है जिसे राजा नहुष ने नगर में खोदवाया था, किन्तु प्रशासन की अनदेखी एव संवेदनहीन प्रक्रिया के चलते उक्त स्थान अपनी बदहाली पर ऑसू बहा रहा है ।
पहले नहुष नगर के नाम से सुविख्यात अब घोसी के नाम से प्रख्यात हो चुका है बताते है कि राजा नहुष का श्राप था कि अगर 365 तालाब खोदवा कर सबसे अंतिम वाली पोखरी में स्नान करेंगे तो चर्म रोग एवं कोढ़ समाप्त हो जायेगा । राजा नहुष ने पोखरियो की खुदाई शुरू कराते हुए सबसे अंतिम पोखरी घोसी से जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 29 पर स्थित सीताकुण्ड के पास खुदी जिसमे राजा नहुष ने स्नान किया । तब उनका कोढ़ एकदम से समाप्त हो गया ऐसा सर्व विदित है राजा नहुष के बाद वनागमन को जाते समय माता सीता ने इसी पोखरी में स्नान किया था तभी से इसका नाम सीता कुण्ड से प्रख्यात हो गया हर महीने दूर दराज से आने वाले हजारों लोग उक्त पोखरे में स्नान कर अपने आप को रोगों से मुक्त होते है।
पहले नहुष नगर के नाम से सुविख्यात अब घोसी के नाम से प्रख्यात हो चुका है बताते है कि राजा नहुष का श्राप था कि अगर 365 तालाब खोदवा कर सबसे अंतिम वाली पोखरी में स्नान करेंगे तो चर्म रोग एवं कोढ़ समाप्त हो जायेगा । राजा नहुष ने पोखरियो की खुदाई शुरू कराते हुए सबसे अंतिम पोखरी घोसी से जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 29 पर स्थित सीताकुण्ड के पास खुदी जिसमे राजा नहुष ने स्नान किया । तब उनका कोढ़ एकदम से समाप्त हो गया ऐसा सर्व विदित है राजा नहुष के बाद वनागमन को जाते समय माता सीता ने इसी पोखरी में स्नान किया था तभी से इसका नाम सीता कुण्ड से प्रख्यात हो गया हर महीने दूर दराज से आने वाले हजारों लोग उक्त पोखरे में स्नान कर अपने आप को रोगों से मुक्त होते है।
उक्त धरोहर एवं पौराणिक स्थल सीता कुंड अस्तित्व सिकुड़ता नजर आ रहा है तो दूसरी ओर जलकुंभी से पेट भरे होने के कारण किसी चारागार से कम नजर नही आ रहा है हिन्दू युवा वाहिनी घोसी जनपद मऊ के सदस्य प्रमोद चौधरी ने सुंदरीकरण एव स्रजन को लेकर प्रशासन को लेकर इस तरह ध्यान देते हुए सुंदरीकरण कराये ताकि सीताकुण्ड की पहचान को आजीवन मानस पटल पर केंद्रित किया जा सके हाला की इन दिनों सफ़ाई की बाट जोह रहा सीताकुण्ड जलकुंभी से पूर्ण रूप से पटा पड़ा हुआ है।