आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
वर्षों से लगातार करते आ रहे हैं रस्म अदायगी गुरुवार को खिचड़ी लेकर पहुंचे नत्थूपुर गांव।
11अगस्त 1999 को शहीद हो गए थे रमेश यादव।
आज़मगढ़: मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है लोग एक दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं। सगड़ी तहसील के जवाहर नवोदय विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी पद पर कार्यरत पर्यावरण प्रेमी एव समाज सेवी इफ्तेखार आजमी शहीद रमेश यादव की बहनों को लगातार मकर संक्रांति के दिन कई वर्षों से खिचड़ी भेजना नहीं भूलते ।अपने वेतन से जो कुछ बचाते है वह समाज सेवा में लगाते चले आ रहे है।
यह उन्हें एक प्रकार का जुनून कहे या कुछ और क्षेत्र में प्रति वर्ष हजारो पौधे जहाँ लोगो को मुफ्त वितरित करते है वही स्वय पेड़ो को लगाते है।और उनकी देखभाल भी करते है। यही जुनून उन्हें सबसे अलग रखता है।जब रमेश यादव जब 11 अगस्त को कारगिल में शहीद हो गए तब से अब तक उनकी तीनो बहनों को एक भाई का फर्ज निभाते हुए खिचड़ी हिन्दू परम्परा के तहत पहुंचाते चले आ रहे है। यही नही उस परिवार के साथ हर सुख दुख में सरीख होते है।
वही रमेश यादव अपने माता-पिता के अकेले के लड़के थे। पूरा परिवार अनाथ हो गया थे। उनकी तीन बहने चंद्रकला, शशि कला, मनकला तीनों बहनों के सिर पर से भाई का साया उठ गया था। उस समय नवोदय विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी करने वाले इस्तेखार आज़मी ने एक नेक संकल्प लिया था मैं भाई बनकर इन तीनों बहनों की जो भी संभव मदद होगी करता रहूंगा। इसी क्रम में वर्षों से हिंदू पर्व की रस्म अदायगी करते चले आ रहे हैं और मकर संक्रांति के दिन इन तीनों बहनों को खिचड़ी पहुंचाते हैं। उस परंपरा को आज भी निर्वहन करते हुए इन्होंने अलग नजीर पेश की है। और हिन्दू मुस्लिम भाई चारे की मिसाल पेश की है।

