आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
आज़मगढ़: अन्याय शोषण व भ्रष्टाचार विरोधी संगठन भारत परिषद के प्रदेश महासचिव आजमगढ़ जिले के सगड़ी तहसील अंतर्गत दीघवनिया गांव में ग्रामीणों संग बैठक कर गांव सरकार के अधिकार को बताया।
संगठन के प्रदेश महासचिव बेचू यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम सभी गांव वाले आजाद भारत के गुलाम नागरिक बने हुए हैं। हमें सिर्फ आजादी का लॉलीपॉप दिखाया जा रहा है, लेकिन जो आजादी वास्तविक रूप से है वह गांव वालों को महसूस नहीं हो रहा है। श्री यादव ने यह भी कहा जब देश हमारा गुलाम था उस समय यही गांव के रणबांकुरे ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। सीने पर गोलियां खाई थी। तमाम तरह के काले पानी की सजा काटकर अपने प्राणों की आहुति देकर भारत को आजाद कराया था। उनका सपना था जिस दिन हमारा देश आजाद होगा, उस दिन से देश में हमारे हिंदुस्तानियों की सरकार बनेगी और हमारे हिंदुस्तानी भाई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, जन प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी कर्मचारी बन कर देश के दबे कुचले शोषित वर्ग जो समाज का अंतिम व्यक्ति होगा उनके तक मान सम्मान व विकास की किरणें पहुंचाने का काम करेंगे। समाज के अंतिम व्यक्ति को लगेगा कि हम गुलाम नहीं बल्कि भारत आजाद के स्वाभिमानी नागरिक हैं।
संगठन के प्रदेश महासचिव बेचू यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम सभी गांव वाले आजाद भारत के गुलाम नागरिक बने हुए हैं। हमें सिर्फ आजादी का लॉलीपॉप दिखाया जा रहा है, लेकिन जो आजादी वास्तविक रूप से है वह गांव वालों को महसूस नहीं हो रहा है। श्री यादव ने यह भी कहा जब देश हमारा गुलाम था उस समय यही गांव के रणबांकुरे ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। सीने पर गोलियां खाई थी। तमाम तरह के काले पानी की सजा काटकर अपने प्राणों की आहुति देकर भारत को आजाद कराया था। उनका सपना था जिस दिन हमारा देश आजाद होगा, उस दिन से देश में हमारे हिंदुस्तानियों की सरकार बनेगी और हमारे हिंदुस्तानी भाई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, जन प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी कर्मचारी बन कर देश के दबे कुचले शोषित वर्ग जो समाज का अंतिम व्यक्ति होगा उनके तक मान सम्मान व विकास की किरणें पहुंचाने का काम करेंगे। समाज के अंतिम व्यक्ति को लगेगा कि हम गुलाम नहीं बल्कि भारत आजाद के स्वाभिमानी नागरिक हैं।
लेकिन अमर शहीदों के सपनों को चकनाचूर आज के जनप्रतिनिधि नेता सरकारी अधिकारी व कर्मचारी कर रहे हैं। गांव की गरीब व अनपढ़ जनता की तहसील पर ब्लॉक पर थाना पर कहीं सुनवाई नही हो रही है। लोग मामूली सा काम के लिए वरासत पेंशन एफआईआर छोटे-छोटे विवाद की शिकायत भ्रष्टाचार की शिकायत जैसे सैकड़ों मामलों को लेकर गांव की जनता परेशान है। लेकिन जनप्रतिनिधि से लगाए थाना पुलिस कर्मचारी अधिकारी सभी सरकारों में तानाशाह बने रहते हैं। जो दुर्भाग्यपूर्ण है। अमर शहीदों के बलिदान का मजाक उड़ाया जा रहा है। जब हमारे गांव का एक आम आदमी थाने पर समस्या को लेकर चला गया और कोतवाल उस पीड़ित को सम्मानजनक शब्द का प्रयोग कर अपने पास बैठा कर उसकी बात को गंभीरता से सुने, और तत्काल पुलिस भेज न्याय करा दें, उसे हम आजाद भारत के आजाद नागरिक कहेंगे। लेकिन यहां तो बगैर नेताओं से जुगाड़ लगाएं और रिश्वत दिए एक मामूली सी एफआईआर दर्ज नहीं हो रही है। गरीबों की सुनवाई की बात तो दूर है, ठीक यही हालत तहसील ब्लाक जिला हर सरकारी दफ्तरों की बनी हुई है। इसलिए हम कह रहे हैं कि आजाद भारत के गुलाम हम गांव की जनता बनी हुई है यही गुलामी खत्म होगी तब लागू होगी गांव सरकार।