आज़मगढ़।
रिपोर्ट: वीर सिंह
माताएं रखें विशेष ध्यान।
शिशु को करने दें पर्याप्त आराम।
दें तरल पदार्थ और हल्के पौष्टिक भोजन।
मातायें शिशुओं को जरूर कराएं स्तनपान।
आजमगढ़, 20 सितंबर 2021: मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आईएन तिवारी ने कहा कि बदलते मौसम में संक्रमण से सबसे ज्यादा नवजात एवं बच्चे प्रभावित होते हैं। ये मच्छर गर्म, आर्द्र मौसम और ठहरे पानी में पनपते हैं। इसी वजह से बारिश में डेंगू के मामले ज्यादा होते हैं। यही मच्छर चिकनगुनिया, डेंगू, जैसी अन्य बीमारियों को भी फैलाने की क्षमता रखते हैं। मौसमी बीमारियों व डेंगू से शिशु एवं बच्चों के बचाव के लिए सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर जांच और इलाज की सुविधा है।
मंडलीय जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ राजनाथ ने बताया की डेंगू संक्रमित मच्छर के काटने के चार से दस दिनों के बाद बीमारी सामने आती है। बच्चे को बुखार और त्वचा पर चकत्ते हों या फिर जोड़ों में दर्द होना, शिशुओं और छोटे बच्चों में इसके लक्षण अक्सर हल्के होते हैं। शिशुओं और बच्चों में डेंगू के लक्षणों की शुरुआत आमतौर पर वायरल बीमारी के लक्षणों की तरह ही होती है |
लक्षण-
शरीर का बढ़ा हुआ तापमान करीब एक हफ्ते तक रहना
शरीर का कम तापमान (96.8 डिग्री फारेनहाइट से कम)
अत्यधिक उल्टी होना
ठंडी व पसीने होना
रक्तस्त्राव, शिशु को उल्टी होना या मल में खून आना
थका हुआ या बेचैन महसूस करना
तेज सांसे चलना,पेट में दर्द होना
चिड़चिड़ापन और अशांत होना
सामान्य से अधिक शिशु का रोना
मसूडों या नाक से खून आना
शरीर पर चकत्ते होना
दिन में तीन या इससे ज्यादा उल्टी होना
बड़े बच्चों को नीचे दिए गए लक्षण हो सकते हैं -
तेज बुखार जो आता-जाता रहे, आंखों के पीछे दर्द, जो कि आंखों को घुमाने पर और अधिक होता है ,जोड़ों में और सिर में दर्द होना ,भूख न लगना, मिचली जैसा महसूस होना।
डेंगू का इलाज न कराया जाए तो यह गंभीर डेंगू का रूप ले सकता है, जिसे डेंगू हैमरेजिक फीवर (डी.एच.एफ.) भी कहा जाता है। इसके लक्षण सामने आने के तीन से सात दिन के अंदर आपके बच्चे के शरीर का तापमान घटने लग सकता है।
सावधानी - बच्चे को आइबूप्रोफेन या कोई प्रज्वलनरोधी (एंटी इन्फ्लामेटरी) दवाएं नहीं दें, क्योंकि डेंगू की वजह से खून में प्लेटलेट्स का स्तर घट जाता है और इससे रक्तस्त्राव हो सकता है। आईब्रूप्रोफेन और अन्य प्रज्जवलनरोधी दवाएं भी खून पर इसी तरह का प्रभाव डालती हैं, जिससे की समस्या और गंभीर हो सकती है।
उपाय –
शिशु को ज्यादा से ज्यादा आराम करने दें
शिशु को तरल पदार्थ पिलाएं और हल्के और पौष्टिक भोजन दें।
स्तनपान कराने वाली महिलाएँ को स्तनपान कराते रहना चाहिए। स्तनपान अन्य महत्वपूर्ण तरल पदार्थों की कमी पूरी करता है, जो शरीर में पानी की कमी से बचाता है।
बुखार कम करने के लिए हर थोड़ी देर में गीली पट्टियां उसके माथे पर रखें।
डेंगू बुखार से बचाव –
डेंगू फैलाने वाले मच्छरों से दूर रहें।
मच्छर ठहरे हुए पानी में पनपते है इसलिए घर व आसपास के क्षेत्र को साफ रखें।
खुले में पानी जमा न हो और पौधों के आसपास सफाई रखें।
खाली डिब्बों या पुराने गमलों को हटा दें, इनमें पानी जमा हो सकता है।
कूलर, खुले नालों में पानी इकट्ठा होने के अन्य स्थानों पर मिट्टी के तेल की कुछ बूंदें डाल दें।
बच्चे को पूरी बांह की कमीज व पैंट पहनाएं, ताकि त्वचा ढँकी रहे।
बच्चे को हल्के रंग के कपड़े पहनाएं (गहरे रंग के कपड़े मच्छरों को आकर्षित करते हैं)।
सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
मच्छरों को घर में प्रवेश करने से रोकने के लिए खिड़कियों पर जाली नहीं लगी है, तो अब लगवा लें | शिशु व बच्चों को ठंड या कमजोरी , सुबह या शाम को तापमान में उतार या चढ़ाव लगें तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में बच्चे की जांच कराएं तथा चिकित्सक की सलाह पर ही दवा लें।

