आज़मगढ़।
रिपोर्ट: गौरव सिंह राठौर
प्रार्थना से प्रारंभ होते हैं आज भी शिक्षण संस्थान
बचपन से शुरू होकर पूरे जीवन चलता रहता है प्रार्थना का सिलसिला
आज़मगढ़: अपने जीवन में हर नया काम प्रारंभ करने से पहले लगभग हम सभी मन ही मन उस कार्य की सिद्धी हेतु ईश्वर से प्रार्थना करते हैं उसके बाद ही कार्य प्रारंभ करते हैं। कदाचित यह मनेावृति बचपन में विद्यालय जाने पर प्रार्थना सभा के साथ पठन पाठन आरंभ करने की आदत के चलते उत्पन्न हुयी मानी जा सकती है। परन्तु विद्यालयी शिक्षा से अछूते रहे व्यक्तियों के संबंध में भी यह तथ्य विभिन्न शोधों से प्रमाणित हुआ है कि प्रत्येक व्यक्ति कोई नया कार्य आरंभ करने से पूर्व अपने इष्टदेव का स्मरण अवश्य करता है। ठीक उसी तरह जैसे प्रत्येक विद्यालय में शिक्षण कार्य दैनिक प्रार्थना सभा के आयोजन से ही प्रारंभ होता है। प्रार्थना सभा किसी भी विद्यालय का एक ऐसा दर्पण है जो उस विद्यालय के भौतिक, शैक्षिक, सामाजिक, मानसिक, सांस्कृतिक और आध्यत्मिक वातावरण का साफ एवं स्पष्ट चित्र दिखलाता है।आपको बताते चलें कि हम बात कर रहे हैं प्राथमिक विद्यालय चकलालचंद की जहां औपचारिकता के साथ कुछ प्रार्थनाओं, प्रतिज्ञाओं और राष्ट्रगान का अबोध छात्र-छात्राओं द्वारा शुद्ध-अशुध्द रुप से गायन होता है, जहां कार्यरत शिक्षक बच्चों को शुद्ध रूप से प्रार्थना के महत्व बताते हैं और बच्चों को जीवन में प्रार्थना का महत्व बताते हैं।